राष्ट्रीय एकता दिवस – डॉ क्षमा कौशिक

नव भारत निर्माण के, शिल्पी थे सरदार। सम्मुख बल्लभ के हुआ, नत मस्तक संसार।। अखंडता की नींव पर, भारत बना महान। ऋणी सदा यह देश है, करता है अभिमान।। धन्य…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

क्यो चेहरा आज उखडा सा हुआ है। लगा जो तीर छलनी सा हुआ है।   अदाएं यार हमको है लुभाती। ये दिल मेरा भी दीवाना हुआ है।   लड़े है…

दुर्लभ है मानुष जीवन – सुनील गुप्ता

दुर्लभ है मानुष जीवन मिले न बारंबार  ! तरूवर से टूट पत्ता गिरे, बहुर न लगता डार !!1!!   चौरासी लाख हैं योनियाँ भटके जन्म मृत्यु द्वार ! करले सत्कर्म…

श्रमिक- रेखा मित्तल

भोर हुई ,ले डिब्बा चल दिया, घर बनाने दिन रात श्रम  करता मेहनत से न घबराता दो वक़्त की रोटी के लिए स्वाभिमान को नहीं बेचता मन के भीतर द्वन्द्…

अनुमति – मीरा पाण्डेय

मत देना अनुमति तुम . मुझे अपने दिल में रहने की . .बसते हो फरेब जहां . कौन बसे उस बस्ती में . ..आहिस्ता मनुहार की . ..प्रेम हर पल…

गिनती की बात – प्रियंका सौरभ

जो गिने गए, वे कुछ थे, जो न गिने गए, वे सब थे। गिनती से बाहर जो छूट गए, उनका दर्द, उनकी भूख अब तक जीवित है। कहते हो —…

पहचाना आपने ? (व्यंग्य) – विवेक रंजन श्रीवास्तव

vivratidarpan.com – अरे कैसी बात करते हैं, आप भी! संकोच में ऐसा कह चुकने के बाद , वे बातों बातों में वह सूत्र ढूंढते हैं कि किसी तरह मिलने वाले…

ग़ज़ल(हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

रोशनी चांद की बेअसर हो गई । ये सियासत लुटेरों का घर हो गई । गांव में जो नदी थी कहां गुम हुई , ज्ञात अब ये हुआ वो ढहर…

ये बहते आंसू -अनिल भारद्वाज

सुन तो लेते हैं मगर कुछ नहीं कहते आंसू फिर भी कुछ कहने को आ जाते हैं बहते आंसू। कभी गम में कभी खुशी में या कभी यूं ही, टपकने…

भोजपुरी छठ गीत – श्याम कुंवर भारती

भोरवे भोरवे अईली छठ घटिया उगी के करा हो अंजोर। हाली उगा हो सूरज देव होला अरघीया के हो देर। जगवा में बाड़ा तू ही साक्षात् एगो देवता। देइब हम…