चुप्पी का सन्नाटा – प्रियंका सौरभ

कभी बैठ अकेले, धुंधले चांद की परछाईं में, सांसों की लय पर सुनना, वक़्त की खामोश धुन, जहां हर सफ़ेद लहर, मौसम की थकी आह है।   वो जो नयनों…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

दे चुके  बेटी खानदानी को। हम न भूलेगें अपनी रानी को।   आज रोकेगे इस कहानी को। इश्क मे बढ़ती इस रवानी को।   कर गये कुछ गुनाह अंजाने। हो गया…

प्रिय हेतु – सुनील गुप्ता

( 1 ) लिखा प्रिय हेतु एक पत्र मैंने.., दिल की अतल गहराइयों से !! ( 2 ) मिला प्रिय से सुंदर उत्तर मुझे.., जिसे दिल में चला संजोए !!…

मेरी लकीरें मेरी कविताएँ (काव्य संग्रह) – सुधीर श्रीवास्तव

vivratidarpan.com- जयपुर में निवासी इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त वरिष्ठ कवि श्रीकांत तैलंग तकनीकी पृष्ठभूमि के बावजूद साहित्य,समाज और संवेदना के क्षेत्र में सक्रिय रहने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।…

बहुत है – ज्योत्सना जोशी

बेशक तुझसे दूर होने का मलाल बहुत है, जाने क्यों ठहरी निगाहों में हलचल बहुत है।   घटने-बढ़ने की बात कमज़र्फ किया करते हैं, अहसासात में उफान का समंदर बहुत…

गीतिक – मधु शुक्ला

अब नया कौटिल्य कोई देश हित में ढूंढ लायें, स्वर्ग सी सुंदर मनोहर निज धरा को हम बनायें ।   एकता पनपे जगत में हो व्यवस्था इस तरह की, न्याय…

टेग करने वाले कभी डरते नहीं,जो डरते हैं वो (व्यंग्य) – मुकेश “कबीर”

vivratidarpan.com – आजकल टेगड़ों से बचना बड़ा मुश्किल है, भले ही आप महीने भर बाद फेसबुक खोलें आपको कई लोग टेग कर देते हैं फिर या तो इनकी महीने भर की…

ग़ज़ल(हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

काठ के घोड़े हकीकत जानते क्या अस्तबल की । झोंपड़ी की आग की या पेट में सुलगी अनल की । छांव बरगद में जलन है और बाड़ों में तपन है…

नीलमणि – नीलांजना गुप्ता

नाग सहेजे ज्यों मणि त्यों सहेज परिवार। यही धरा का स्वर्ग है बाकी सब बेकार।। त्याग, प्रेम की सम्पदा सबसे है अनमोल। ख़ून के रिश्तों को कभी मत पैसे से…

प्रकाश पर्व – सुनील गुप्ता

प्रकाश पर्व है आनंद उत्सव, बरसे हर्ष !!1!!   गुरु नानक हैं प्रेरणादायक, ओंकार एक !!2!!   खालसा पंथ किया मार्ग प्रशस्त, सेवा में रत !!3!!   अगाध श्रद्धा सतिनामु…