लोकतंत्र सड़कों पर नहीं, संवाद से लिखा जाए – विवेक रंजन श्रीवास्तव

  neerajtimes.com – लोकतंत्र मतपेटी से ही नहीं,मतभेद में भी जीवित रहता है। असहमति उसकी कमजोरी नहीं, प्राणवायु कही गई है। इसलिए धरना, प्रदर्शन,आंदोलन और हड़ताल लोकतंत्र की स्वाभाविक अभिव्यक्तियाँ…