नया लोकतंत्र? (संपादकीय स्थान रिक्त है) -प्रियंका सौरभ

  Vivratidarpan.com  – “जब कलम चुप हो जाए: लोकतंत्र का शोकगीत”   आपातकाल के दौरान अख़बारों ने विरोध में अपना संपादकीय कॉलम ख़ाली छोड़ा था। आज औपचारिक सेंसरशिप नहीं है, लेकिन…

जगन्नाथ का भात, जगत पसारे हाथ – दिनेश चंद्र वर्मा

vivratidarpan.com – हिन्दू धर्म की वर्ण व्यवस्था एवं जाति परम्परा की आलोचना करना आज एक फैशन सरीखा हो गया है, पर इस धर्म में कई तीर्थ स्थान ऐसे भी हैं, जहां…

यति मातु वैष्णवी – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

  वैष्णवी दुःख तारिणी सर्व कष्ट निवारिणी, जग के संकट माते आप दूर करें अभी।   याचक से द्वार तेरे विपदा अनेक घेरे, मात हम भक्तों पर दृष्टि डालिये कभी।…

मेरी तरहा क्या तुम्हें भी – गुरुदीन वर्मा

  मेरी तरहांक्या तुम्हें भी, कोई गम तो नहीं है। मेरी तरहा तुम पर भी, कोई सितम तो नहीं है।। मेरी तरहांक्या तुम्हें भी————————।।   ऐसी किस्मत तो हमको यार,…

“जब व्यवस्था प्रेम को निगल गई: मंजू वर्मा की आत्मकथा पर एक दृष्टि” – प्रियंका सौरभ

  vivratidarpan.com – प्रेम की सबसे सच्ची परीक्षा तब होती है जब वह समय, समाज और सत्ता की सख्त दीवारों से टकराता है। ‘राज सर आईपीएस’ केवल एक प्रेम कथा…

संकेत साहित्य समिति की काव्य फुहार व सम्मान समारोह संपन्न

vivratidarpan.com बिलासपुर – संकेत साहित्य समिति बिलासपुर छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में दिनांक 24.06.2025 को राजकिशोर नगर में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि कवि संगम त्रिपाठी,…

मन की बातें – सविता सिंह

  करती हूँ जिससे मैं अपने मन की बातें, वो एक रफ कॉपी अरु ढेर सारी किताबें। उस रफ कॉपी के पन्नों पर दिखता अतीत जीते उन क्षणों को समय…

आपातकाल: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे दुखद और शर्मनाक घटना – विष्णुदत्त शर्मा

  Vivratidarpan.com – “कांग्रेस का लोकतंत्र में विश्वास तब तक है जब तक वह सत्ता में है। जब वह सत्ता से बाहर होती दिखाई देती है, वह संविधान और लोकतंत्र…

सत्ता बचाने की हताशा में लिया गया राष्ट्र विरोधी निर्णय था आपातकाल – हितानंद शर्मा

  Vivratidarpan.com – आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर 25 जून 1975 की आधी रात को देश पर थोपे गए ‘आपातकाल’ को 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत की जनता…

साहित्यकार विष्णु प्रभाकर की 113 वी जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य सम्मान समारोह हुआ आयोजित

कर्नल प्रवीण शंकर – हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकार आदरणीय विष्णु प्रभाकर की 113 वी जयंती के उपलक्ष्य में गाँधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा “सन्निधि संगोष्ठी” के पावन सभागार में एक भव्य…