भोजपुरी कजरी लोक गीत – श्याम कुंवर भारती

  सावन में भारती भइले बदनाम हो नजरिया से दूर कईलु सजनी।   लोगवा हमे तोहरे नाम से बुलावेला, प्रेमवा के लुगती हीया लहकावेला। बरसेले अंखियां शुबह शाम हो। नजरिया…

उत्तराखंड निवेश उत्सव – 2025 में केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार के प्रयासों को सराहा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में शनिवार को रुद्रपुर में आयोजित, उत्तराखंड निवेश उत्सव-2025 में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने, उत्तराखंड में दिसंबर 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर…

कितना विवस – नीलकान्त सिंह नील

  मैं कितना विवस हो चला हू, कि औंधे मुह ही गिर पड़ा हू शक्ति अब बाकी कुछ नहीं है उलझनों में उलझा पड़ा हू।।   ताकता हू जिधर भी…

कृत्रिम बुद्धिमत्ता: नवाचार की उड़ान या बौद्धिक चोरी का यंत्र? – प्रियंका सौरभ

vivratidarpan.com –  कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज नई रचनात्मकता का माध्यम बन चुकी है, पर यह बहस का विषय है कि क्या यह नवाचार, रचनाकारों की मेहनत की चोरी पर टिका…

फाइलों में लटकी तबादला नीति: शिक्षक टकटकी लगाए बैठा है – डॉ. सत्यवान सौरभ

  Vivratidarpan.com – हरियाणा के शिक्षक एक बार फिर से असमंजस, अफवाहों और अधूरी सूचनाओं के बीच फंसे हुए हैं। स्कूलों में रोज़ सुबह की शुरुआत चाय और स्टाफरूम की…

नव अम्बु – ज्योत्सना जोशी

  अभी धरा पर नव अम्बु गिरे हैं उर की कोपल मनुहार करें तुम श्रृंगार ओढ़ मधुमास का नैनन में प्रिय घन विस्तार भरें। अभी धरा पर……… जगा कर प्रणय…

आखिरी सवाल ? – दीपक राही

  दुनिया का आखिरी सवाल जब पूछा जा रहा होगा, तब न तो सवाल पूछने पर पाबंदी होगी और न ही किसी को सूली पर चढ़ाया जा रहा होगा, बस…

महात्मा बनादास जी महाराज : तप, त्याग और तत्त्व का त्रिवेणी संगम

vivratidarpan.com – भारत की आध्यात्मिक धारा में असंख्य संतों ने अपनी साधना से मानवता का पथ प्रशस्त किया है। कुछ संत अपने चमत्कारों से प्रसिद्ध हुए, कुछ उपदेशों से, और कुछ…

मोक्ष प्रदाता, संपूर्ण चराचर जगत के नाथ : काशी विश्वनाथ – अंजनी सक्सेना

vivratidarpan.com- काशी विश्वनाथ की महिमा अपरंपार है। उनकी महिमा का वर्णन करना तो सूरज को दिया दिखाने के समान है। काशी जहाँ के कण-कण में शिव विराजमान है वहाँ के…

धडल्ले से उपयोग हो रही है इमोजी की वैश्विक भाषा – विवेक रंजन श्रीवास्तव

vivratidarpan.com – भाषा हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है। देश को जोड़ने में हिन्दी के महत्व को समझते हुये ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में…