झंकार – सविता सिंह

नीरव जीवन की स्मृतियों की राख तले नयी आहट से स्पंदित साँसे मौन को करती झंकृत। बंद पड़ी वीणा के तार, छूने से फिर झंकृत हुए, मुरझाए उपवन के मन…

प्ररेणाओं का गुलदस्ता, चिंतन और मनन कराती कविताओं का संग्रह

vivratidarpan.com – कवि सुधीर श्रीवास्तव का काव्य-संग्रह “ज़िंदगी है… कट ही जाएगी” आधुनिक हिंदी कविता की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जिसमें जीवन, समाज और अध्यात्म एक साथ चलते…

राजनीति में भाषा की मर्यादा का प्रश्न – डॉ. सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com –  जिस देश में राजनीति को राष्ट्र कल्याण और जनसेवा के लिए समर्पित नहीं समझा जाता, वहां राजनीतिक शुचिता की बात करना ही बेमानी है। विगत कुछ वर्षों से…

राज्य स्थापना की रजत जयंती पर रामनगर में आयोजित राज्य स्तरीय “जन वन महोत्सव” का शुभारंभ

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के शुभ अवसर पर रामनगर में राज्य स्तरीय जन वन महोत्सव का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि…

टैबलेट मेरा दोस्त – डॉ. सत्यवान सौरभ

टैबलेट मेरा प्यारा दोस्त, सिखाता मुझे हर रोज़ कुछ खास। खेल-खेल में ज्ञान बढ़ाता, दुनिया का नक्शा दिखलाता।   स्क्रीन पर चमकते रंग-बिरंगे, वीडियो, किताबें और गाने। पर मम्मी कहती…

छंद छटा (बेटियां) – जसवीर सिंह हलधर

रूढ़ियों की बेड़ियों को, तोड़ ताड़ आगे बढ़ीं, सरहदों पे टैंक भी चलाने लगीं बेटियां । कार, बस, ट्रेन की तो, छोटी मोटी बात अब, चांद और मंगल पे जाने…

स्वयं को गढ़ने की प्रक्रिया है मंडला आर्ट- विवेक रंजन श्रीवास्तव 

vivratidarpan.com – मंडला चित्र बनाना स्वयं को गढ़ने की प्रक्रिया है। जब कलाकार वृत्त बनाता है, तो वह ब्रह्मांड नहीं, अपने भीतर के अंधेरे में एक चित्र दीप जलाता है ,जिसकी…

मुख्यमंत्री ने किया प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन का शुभारंभ

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को दून विश्वविद्यालय में राज्य स्थापना के रजत रजत जयंती समारोह के अंतर्गत आयोजित “प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन” का शुभारंभ किया। इस अवसर पर…

चौपाई छंद – मणि अग्रवाल

माँ वाणी की महिमा गाऊँ। दर पर प्रतिदिन शीश झुकाऊँ।। सच्चे मन से है अभिनंदन। स्वीकारो माँ मेरा वंदन।।   श्वेत वसन तन पर हैं शोभित। कंकण कुण्डल करते मोहित।।…

इतिहास रचने आई हो – ममता प्रीति श्रीवास्तव

नारी तू कितनी अतुलनीय फिर भी न सराही जाती है, सर्व गुणों की खान हो तुम फिर भी ठुकराई जाती हो। पर अब…….. बदल रहा ये देश समूचा,बदल रहा इतिहास,…