कविता : संवेदना बनाम बौद्धिकता – एक साहित्यिक विमर्श) – डॉ जयप्रकाश तिवारी

  vivratidarpan.com -लखनऊ के वरिष्ठ साहित्यकार, समीक्षक श्री विनय श्रीवस्ताव जी ने एक वैचारिक, साहित्यिक विमर्श छेड़ते हुए अभिव्यक्ति दी है, उनका कथन है कि “कविता में बौद्धिकता का पुट…

इन आँखों की मस्ती – सविता सिंह

तेरी आँखों से बचना है मुश्किल, तभी तो सब कहे तुझे कातिल। तेरी आँखों में इक समंदर है, डूब जाने कि कसम खाई है। तैरना भी हमें नहीं आता, और…

फूले का भारत – डॉ सत्यवान सौरभ

शूद्र अछूत कह जिन्हें, माना था लाचार। फूले ने दी सीख तो, खोला ज्ञान-द्वार॥   यज्ञ-जपों की आड़ में, होता रहा प्रपंच। फूले ने जब कहा ‘नहीं’, टूटा झूठा मंच॥…

राष्ट्रीय पुनरुत्थान की प्रेरणा देने वाला पर्व- वैशाखी – सुभाष आनन्द

 vivratidarpan.com – भारतवर्ष  मेलों और त्यौहारों का देश है। इनमें से कुछ का सम्बन्ध धर्म के साथ है तो कुछ का इतिहास के साथ और कुछ का सम्बन्ध मौसम के…

बंजारा बस्ती (कहानी) – जनक वैद

  vivratidarpan.com – हमारे उस छोटे से गाँव में सब मिलजुल कर रहते थे। अर्थात किसी को भी किसी से कोई शिकायत नहीं थी। एक दिन प्रातः सभी ने देखा…

कर्म और भक्ति के संयुक्त अवतार वीर हनुमान – डॉ. मुकेश “कबीर”

vivratidarpan.com – हनुमान जी को यदि कर्म और भक्ति का संयुक्तावतार कहा जाए तो गलत नहीं होगा क्योंकि वे एक ही समय में कर्म और भक्ति दोनों करते हैं,एक पल…

वर्द्धमान महावीर जयंती – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

  महावीर ने विश्व को, दिया अहिंसा मन्त्र। कैसे तोड़ें हम सभी, इच्छाओं का तन्त्र।।1   राज पाट सब छोड़ कर, वन में किया प्रवास। आत्म ज्ञान का तब हुआ,…

मा0 सीएम के मार्गदर्शन में डीएम के प्रयास, 03 माह में देने लगे सुखद परिणाम

देहरादून 12 अप्रैल, 2025 अन्तराष्ट्रीय स्ट्रीट चिल्ड्रन दिवस के अवसर पर बाल भिक्षावृत्ति निवारण तथा बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने हेतु मा0 सीएम के मार्गदर्शन एवं डीएम सविन…

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आई.आर.डी.टी. ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला में प्रतिभाग किया

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को आई.आर.डी.टी. ऑडिटोरियम, सर्वेचौक, देहरादून में संविधान निर्माता भारतरत्न डॉ. भीम राव अम्बेडकर के “सम्मान अभियान” के सम्बन्ध में आयोजित प्रदेश कार्यशाला में…

ज्योतिबा फुले: क्रांति की मशाल – प्रियंका सौरभ

धूप थी अज्ञान की, अंधकार था घना, उग आया फूले-सा एक सूर्य अनमना। ज्योति बनी वह वाणी, दीप बना विचार, टूटे पाखंडों के जाल, जागा हर परिवार।   जन्मा वह…