सागर तट पर सोमनाथ की, ध्वजा सदा फहराती है।
भारत जिस पर गर्व करे, यह मंदिर ऐसी थाती है।
सदियों से यह अटल खड़ा है, झंझावात कई झेले,
भक्त मंडली जगह-जगह से, शिव दर्शन को आती है।
भारत के ज्योतिर्लिंगों में, प्रथम नाम इनका आता।
सोमनाथ के पुण्यधाम से, देश वासियों का नाता।
सावन में दर्शन करने से, जन्म सफल हो जाएगा,
भक्ति भाव के जल अर्पण से, नित अभिषेक किया जाता।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
श्रावण माह में शिवार्चन (8)- (श्री नागेश्वर जी, गुजरात) –
दारुक वन में दारूक राक्षस, शिव भक्तों को दे संताप।
उनकी रक्षा को तब प्रगटे, श्री नागेश्वर अपने आप।
दारुक का गौरीशंकर ने, किया वहाँ पर तब संहार।
इनके दर्शन से कट जाते, जन्म-जन्म के सारे पाप।
बड़ी महत्ता नागेश्वर की, भारत भर में इनका नाम।
भक्त द्वारका जो भी आयें, दर्शन को आते इस धाम।
दसवाँ ज्योतिर्लिंग यही है, दर्शन से सब दुख हों दूर,
भक्तजनों का मेला लगता, प्रांगण में , नित आठों याम।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
