vivratidarpan.com देवबंद — गुरूद्वारा श्री गुरू नानक सभा में चौथे पातशाह साहिब श्री गुरू रामदास जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया।
मंगलवार रात गुरूद्वारा साहिब में आयोजित कार्यक्रम में संगत को सम्बोधित करते हुए बाबा अजीत सिंह ने कहा कि गुरू रामदास जी ने अपने जीवन में दो सिद्धांतों को सर्वोपरि रक्खा। एक सेवा व दूसरा सिमरन। गुरू जी के बचपन का नाम भाई जेठा था। गुरू जी की छोटी आयु में ही उनके माता पिता का देहांत हो गया। उनका बचपन अपनी नानी के घर गुजरा और उन्होंने चने बेचकर अपना जीवन यापन किया। गुरू अमरदास जी से मिलने के बाद भाई जेठा जी का जीवन बदल गया। अपनी सेवा व सिमरन से उन्होंने गुरू जी द्वारा ली गई सभी परीक्षाएं पास की और चौथे गुरू रामदास बने। जिस भाई जेठा जी के पास बचपन में घर नही था गुरू की कृपा से आज उनका घर (दरबार साहिब अमृतसर) सोने का है। भाई धर्म सिंह ने अरदास की। उपरांत गुरू का अटूट लंगर बरताया गया। इस दौरान श्याम लाल भारती, सचिन छाबड़ा, गुरजोत सिंह सेठी, चंद्रदीप सिंह, हर्ष भारती, सतीश गिरधर, बलदीप सिंह, देवेंद्र पाल सिंह, हर्षप्रीत मनचंदा, पिं्रस कपूर, संदीप धींगड़ा, सन्नी-मन्नी सेठी, मोहित मल्होत्रा, मानव सिंह, हर्ष नारंग आदि मौजूद रहे।
रिपोर्टर — महताब आज़ाद
