vivratidarpan.com – करम पर्व झारखंड का सबसे बड़ा लोकपर्व है, खासकर आदिवासी समाज का। ये भादो महीने की शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाया जाता है।
महत्व क्या है? – प्रकृति की पूजा: करम एक पेड़ का नाम है। आदिवासी प्रकृति को ही भगवान मानते हैं। करम के पेड़ की डाली को गाँव में लाकर उसकी पूजा की जाती है, ताकि खेती अच्छी हो और प्रकृति खुश रहे।
भाई-बहन का पर्व:ये मुख्य रूप से कुंवारी बहनों का पर्व है। बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि के लिए करम राजा से प्रार्थना करती हैं। ये रक्षाबंधन जैसा ही पवित्र रिश्ता है।
फसल का त्योहार: खेती-बारी के बाद जब फसल अच्छी होने की उम्मीद होती है, तब किसान इस पर्व को खुशहाली के लिए मनाते हैं।
कैसे मनाते हैं? – युवतियां पूरे दिन उपवास रखती हैं।
शाम को गाँव के अखरा (नाचने की जगह) में करम डाली गाड़ी जाती है।
उसके चारों ओर रात भर करम गीत गाकर झूमर नृत्य होता है।
दूसरे दिन डाली को नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है।
करम गीत का एक भाव: “करम राजा भाइयों को बनाए रखिहो…”
ये पर्व सिर्फ पूजा नहीं है, ये झारखंड की आत्मा है – प्रकृति, भाईचारा और एकता का प्रतीक।
