साधनावादी सूत्रधार न्यास के तत्वावधान में साधना वाणी पत्रिका का भव्य विमोचन

vivratidarpan.com – साधनावादी साहित्य की वैचारिक यात्रा को एक नई दिशा प्रदान करने वाली ‘साधना वाणी’ ई-पत्रिका के तृतीय अंक माह अक्टूबर 2026 का आभासी विमोचन नवरात्रि के प्रथम दिन दिनांक 11अक्टूबर 2026 को रात्रि 9:00 बजे आभासी माध्यम से अत्यंत गरिमामय एवं साहित्यिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेकानेक साहित्यकारों, विद्वानों एवं साहित्य प्रेमियों ने उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक अवसर को साक्षी भाव से गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम का शुभारंभ डाॅ. ओम प्रकाश मिश्र ‘मधुब्रत’ द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात डॉ. कृष्ण कांत मिश्र ने सभी अभ्यागत अतिथियों, साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
तत्पश्चात डॉ. लवकुश तिवारी ‘माधवपुरी’ने अपनी मोहक, शानदार एवं प्रभावशाली शैली में ‘साधना वाणी’ ई-पत्रिका के अंक 3 माह अक्टूबर 2026 का भव्य विमोचन किया। इस अवसर पर देव अतिथि के रूप में पधारे डॉ. जय प्रकाश तिवारी, बलिया (उत्तर प्रदेश) ने साधनावादी साहित्य के स्वरूप, उसकी अवधारणा एवं वर्तमान संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने साधनावादी साहित्यिक सूत्रधार न्यास के संस्थापक आचार्य डॉ. ओम प्रकाश मिश्र ‘मधुब्रत’ के उल्लेखनीय योगदान एवं नवोदय परिवार के इस अभिनव साहित्यिक पहल एवं उसकी निरंतरता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। आ. राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय ‘गड़बड़ प्रतापगढ़ी’ ने साधनावादी साहित्य की अवधारणा एवं उसकी सामाजिक-साहित्यिक प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए ‘साधना वाणी’ ई-पत्रिका के प्रकाशन को एक उल्लेखनीय एवं सार्थक पहल बताया।
नीलचित्रा व्यास और डा. अनुराधा प्रियदर्शिनी ने साधना वाणी के प्रकाशन पर कहा कि उत्कृष्ट साहित्यिक प्रयासों की सराहना करते हुए इसे सततआगे बढ़ाने के लिए आचार्य डॉ. मधुब्रत सभी को धन्यवाद एवं शुभकामनाएं दीं।
एतदुपरांत डॉ सुधीर श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में साधना वाणी के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की और साथ ही रचनाओं में स्तरीय रचनाओं का भविष्य में आमंत्रण हो, ऐसा सुझाव दिया तथा पटल के नियमों और अनुशासन की चर्चा की।
कार्यक्रम में देव अतिथि के रूप में डॉ छगन लाउ गर्ग विज्ञ जी अपनी हार्दिक शुभकामनाएं एवं साधना वाणी की भूरि भूरि प्रशंसा की।
अथ अनंतर साधनावादी सूत्रधार न्यास के संस्थापक अध्यक्ष डॉ ओम प्रकाश मिश्र ने साधनावादी सृजन की मूलभूत आवश्यकताओं और सृजन की बारीकियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि मानव जीवन की सार्थकता इसी में है कि सृजन की साधना हो और सृजन से लोक मंगल हो । रचना से जीवन में लोक-मंगल का विधान हो।
इसके उपरांत कार्यकारी अध्यक्ष डॉ पूर्णिमा पाण्डेय ने सभी अभ्यागत और अतिथियों का धन्यवाद एवं आभार ज्ञापित किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. जे. एन. भारती ‘बैरागी’ ने साधनावादी साहित्य की विकास-यात्रा, वर्तमान स्थिति तथा उसके उज्ज्वल भविष्य की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने साधनावादी सूत्रधार न्यास एवं नवोदय वैश्विक प्रज्ञान साहित्यिक संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न साहित्यिक उपक्रमों तथा गद्य-पद्य की विविध विधाओं में निरंतर हो रहे सृजनात्मक कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
उन्होंने अपनी प्रभावशाली काव्यात्मक प्रस्तुति बेटियाँ कविता के माध्यम से कार्यक्रम को साहित्यिक ऊँचाई प्रदान करते हुए वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर पूर्णिमा पाण्डेय सहित नवोदय प्रज्ञान साहित्यिक संस्थान से जुड़े अनेक साहित्यकार साक्षी भाव से उपस्थित रहे।
मीडिया अधीक्षक एवं मुख्य अतिथि डॉ. सुधीर श्रीवास्तव सहित अनेकानेक गणमान्य साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। उपस्थित साहित्यकारों मे नीलचित्रा व्यास, डा. अनुराधा आदि प्रमुख रहे।
सफल संचालन एवं आभार- कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन साधनावादी सूत्रधार न्यास के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य डॉ. ओम प्रकाश मिश्र ‘मधुब्रत’ एवं डॉ राजीव रंजन मिश्र ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए इस साहित्यिक यात्रा में सहयोग एवं सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
अंत में अध्यक्षीय अनुमति से डॉ. राजीव रंजन मिश्र ने कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।
इस प्रकार ‘साधना वाणी’ ई-पत्रिका के द्वितीय अंक का विमोचन समारोह केवल एक पत्रिका के प्रकाशन का अवसर न रहकर साधना से सृजन और सृजन से लोकमंगल की ओर अग्रसर साधनावादी साहित्यिक चेतना का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ। यह आयोजन साहित्य को आत्मपरिष्कार, सामाजिक चेतना एवं लोक-मंगल से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक एवं स्मरणीय पहल की निरंतरता के रूप में अंकित हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *