उत्सव के इन नौ दिनों, मची हर जगह धूम।
नृत्य गीत में मग्न हो, सब जन जाते झूम।।
बार-बार दर्शन मिलें, मन में है यह आस।
प्रभु का हो पुनरागमन, बिखरे पुनः सुवास।।
गौरी सुत गणनायका, हरो जगत के पाप।
दुनिया को सद्बुद्धि दो, दूर करो संताप।।
छल प्रपंच हर लोभ मद, इनका हो निस्तार।
*सकल शांति सद्भाव हो, सुखमय हो संसार।।
हाथ जोड़ विनती करें, पुनः पधारें आप।
भूल चूक सब कर क्षमा, हरें सकल संताप।।
जीवन से सबके सदा, विघ्न हरें गणराज।
नित अपना आशीष दें, सकल सँवारें काज।।
जीवन के दुख-दर्द सब, गणपति करिये दूर।
नमन करें करबद्ध हो, श्रद्धा से भरपूर।।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
