मानव कल्याण मंच ने स्कूली बच्चों को बांटे जूते व जुराब, 31 वर्षों से निस्वार्थ सेवा में समर्पित है संस्था

vivratidarpan.com देवबंद — मानव सेवा को समर्पित प्रमुख सामाजिक संस्था मानव कल्याण मंच, देवबंद द्वारा “नर सेवा नारायण सेवा” के मूल मंत्र को अपनाते हुए आज एक और सराहनीय कदम उठाया गया। मंच की ओर से श्री जैन कन्या हाई स्कूल, जोशीवाडा, देवबंद में पढ़ने वाले जरूरतमंद स्कूली बच्चों को शीत ऋतु के आगमन से पूर्व जूते एवं जुराबें वितरित की गईं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मानव कल्याण मंच महिला मंडल की महासचिव श्रीमती ममता वर्मा ने कहा कि जरूरतमंद बच्चों की सेवा करना परम पुण्य का कार्य है। आज की ये छात्राएं ही पढ़-लिखकर देश का भविष्य बनेंगी और आगे चलकर डॉक्टर, वकील, इंजीनियर व सफल व्यवसायी के रूप में समाज को अपनी सेवाएं देंगी।
मंच के संस्थापक अरुण अग्रवाल ने भावुक संदेश देते हुए कहा, “अपने लिए तो सभी इंसान जीते हैं, लेकिन जो दूसरों के लिए जीता है उसे ही असल जिंदगी कहते हैं। जरूरतमंदों की मदद निस्वार्थ भाव से की जानी चाहिए, क्योंकि ऐसी सेवा का फल हमेशा मीठा होता है। गरीबों की दुआओं का कोई मोल नहीं होता और इन्हें पैसों से नहीं खरीदा जा सकता।”
इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष सुशील कर्णवाल ने बताया कि संस्था वर्ष 1995 से लगातार (पिछले 31 वर्षों से) समाज के निर्धन, असहाय व पिछड़े वर्ग की सहायता कर रही है। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ सेवा से ही आत्मसंतुष्टि की अनुभूति होती है और मंच का अंतिम उद्देश्य समाज के प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक मदद पहुंचाना है।
स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती वंदना जैन ने मंच के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों की इस प्रकार मदद करना ही वास्तव में सच्ची ‘नर-नारायण सेवा’ है। उन्होंने मंच का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था पिछले कई वर्षों से लगातार उनके स्कूल के बच्चों की मदद कर रही है।
महिला मंडल की वरिष्ठ सदस्या व मार्गदर्शक श्रीमती प्रतिभा जैन ने मंच द्वारा किए जा रहे मासिक सेवा कार्यों की प्रशंसा की। वहीं, महासचिव राजू सैनी ने संस्था की विभिन्न गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला और स्कूल प्रबंधन का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे: श्रीमती ममता वर्मा, श्रीमती अंजलि त्यागी, राजीव शर्मा, श्रुति वर्मा, रुचि जैन, जूही जैन सहित स्कूल का स्टाफ उपस्थित रहे।
रिपोर्टर — महताब आज़ाद

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