vivratidarpan.com – राम कथा जग मंगल करनी
धूमउ तजइ सहजकरूआई,
अगर प्रसंगसुगंध बसाई।
भनितिभदेश बस्तु भलि बरनी,
राम कथा जग मंगल करनी॥ (बालकाण्ड, चौपाई-5 दोहा 10 से पहले)
मंगलाचरण एवं वन्दना के बाद गोस्वामी जी ने सम्पूर्ण विनम्रता से स्वयं की दीनता और राम भक्तिमयी कविता की महानता, उसकी अपार महिमा वर्णन करने के प्रसंग में ये पंक्तियां लिखी हैं। संदर्भित चौपाई का अर्थ है- ”धुंआ भी अगर के संग सुगंधित होकर अपने स्वाभाविक कड़वेपन को छोड़ देता है, गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं कि मेरी कविता अवश्य भद्दी है, पर इसमें जगत का कल्याण करने वाली राम कथा रूपी उत्तम वस्तु का वर्णन किया गया है, अत: यह भी स्वस्थापित होगी।
श्री रामचरित मानस का एक-एक शब्द शाश्वत है। संदेश मय है। मरा-मरा की धुन में राम राम का उच्चारण कर लूट का कार्य करने वाले वाल्मीकि, ऐसे राम मय हुये कि वे अपने तन मन की सुध-बुध खोकर आदि कवि बन गये। ”रामजी-रामजी रामजी” का मंजीरा वह टेक है, जिससे आज भी हर कोई अपने सारे दुखों से, अवसाद से, मुक्ति पा लेता है। हमारे लोक जीवन में श्री राम जय राम-जय जय राम की धुन घर-घर मन्दिर-मन्दिर, चौपालों में, रची बसी है, ढोल मंजीरा व झांझर के साथ लाखों भक्त अपने सारे कष्ट इस रामधुन में विलीन कर लेते हैं। गोस्वामी जी ने ही, मानस में ही लिखा है-
”तुलसी साक्षी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक,
साहस सुकृत सत्यवृत, राम भरोसे एक।”
और,
कलियुग युग आन नहिं,
जो नर कर विश्वास,
गाई राम गुनगन विमल,
भव तर बिनहि प्रयास।
केवल रामकथा गुनगुनाने से, केवल राम नाम पर विश्वास से, राम मय होकर इस भवसागर को हम पार कर सकते हैं। इसके लिये मानसिक, शारीरिक, आत्मिक स्तर की निर्मलता ही मात्र जरूरी है।
मानस के जिन एक-एक शब्द, एक-एक अर्धाली की विवेचना में विद्वान ग्रंथ पर ग्रंथ लिख सकते हैं, ”राम कथा जग मंगल करनी” उन्हीं अनूठी अर्धालियों में से है। आस्था और विश्वास के स्तर पर श्रीराम चरित मानस के रूप में राम कथा घर-घर में संग्रहित है, पूजित है, इसके अखंड पाठ चल रहे हैं, उच्चारण भले ही अशुद्ध हो लय ताल भले ही लोकप्रिय फिल्मी धुनों की हो पर फल वैसा ही राम मय है। अनेक मानस मण्डलियां साप्ताहिक पाठ करवाती हैं, मास पारायण, नवान्ह पारायण होते हैं। न केवल पारायण करने से वरन सुनने से भी आत्मा शुद्ध होती है, तृप्त होती है। यदि कोई एक भी राम की सच्चाई, दुष्टों के विनाश, माता पिता के आज्ञा पालन, एक पत्नीव्रत, आदर्श भाई, आदर्श राजा, प्रजावत्सल, सर्वरूप अनुकरणीय चरित्र का, अंशमात्र भी अनुकरण कर ले और क्षण भर को भी दानवी प्रवृतियों से विमुख हो जाता है, तो ”जग मंगल” तो होना ही है। अत: रामकथा जग मंगल करनी शाश्वत सत्य है।
जगत की इकाई मानव मात्र है, फिर परिवार है। समाज है, राष्ट्र है और विश्व है आज आवश्यकता है, हर व्यक्ति राम जैसे महानायक के चरित्र जैसा सद्गुणी हो जावे, यदि मंथरा की कूटनीतिक चालों से बचना है, हमें अपने अन्दर के रावण का अन्त करना है तोा राम से ही प्रेरणा लें। सीता सी पतिव्रता पत्नी, राम सा आज्ञाकारी पुत्र भर मिल जावे तो हर परिवार स्वत: सुखी हो जावेगा। उसे इसी धरा में स्वर्ग का अनुभव होगा। हर परिवार सशक्त संपन्न होंगे तो समाज कटुता मुक्त होगा, राम राज्य आ जायेगा और वसुधैव कुटुम्बकम के मंत्र के अनुरूप विश्व कल्याण होगा, जग मंगल होगा।
हममें राम तभी जागेगा जब हम राम कथा को अपनायेंगे-चाहे विश्वास की प्रतिबद्धता से या राम कथा का भावार्थ उसका निहितार्थ पढ़कर, समझकर उसे अपने जीवन में उतारेंगे।
अंत में कवि प्रो. सी.बी. श्रीवास्तव की पंक्तियां कहना चाहूंगा-
है सिसकती अयोध्या, दुखी नागरिक
कट गये चित्रकूटों के रमणीक वन
स्वर्ण मृग चर रहे, दण्डकारण्य को
पंचवटियो में बढ़ गये अपहरण
घूमते है असुर साधु के वेष में,
अहिल्यायें कई बन गई हैं शिला
सारी दुनिया में फैला अनाचार है,
रूकता दिखता नहीं ये बुरा सिलसिला,
हो रहा गांव नगरों में सीता हरण
राम जाने कि क्यों राम आते नहीं।
मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि राम अपने आप नहीं आयेंगे। हमें पुत्रेष्टि यज्ञ करना होगा- हवन अग्नि में हम सबको तपना होगा और राम कथा की खीर खानी होगी, तभी हम सबमें, सदैव उपस्थित राम प्रगट होंगे। हमारे कर्मों में, हमारे आचरण में। (विनायक फीचर्स)
