गीत – नित्यानंद वाजपेयी “उपमन्यु”

लोकतंत्र की मजबूती का शंखनाद है सुनते जाना
शाहों ने जनता से सुलझाया विवाद है सुनते जाना

ज़ाहिर है मसनद पर कोई चौकीदार बहुत चौकस है
इसीलिए तो जनता के आदेशों पर उसका फ़ोकस है
सुलझाने वाली प्रवृत्ति है और सुदृढ़ उत्तम प्रयास है
इस युगदृष्टा की आंखों में केवल और केवल विकास है
वैश्विक अर्थव्यवस्था की अब उपयोगिता प्राप्त करनी है
व्यावसायिकी उठापटक सब निष्क्रिय या समाप्त करनी है
कुछ शैतानों के मन में फिर भी फसाद है सुनते जाना
शाहों ने जनता से सुलझाया विवाद है सुनते जाना
लोकतंत्र की मजबूती का शंखनाद है सुनते जाना

जन गण मन की क्रांति जोतकर शांति बीज बोना है हमको
उन्नति के पथ पर बढ़ना है विश्व-शक्ति होना है हमको
जन-समुद्र मंथन से निकले सारे रत्न देव पाएंगे
धोखे से यदि दैत्य घुसे तो राहु केतु सम कट जाएंगे
लोक धर्म जनहित सर्वोपरि पाल सको तो अमृत पियो तुम
मानवता की सेवा करना चाहो तो निर्बाध जियो तुम
सत्य न्याय दिव्यत्व भरा यह अमृत स्वाद है सुनते जाना
शाहों ने जनता से सुलझाया विवाद है सुनते जाना
लोकतंत्र की मजबूती का शंखनाद है सुनते जाना

शाश्वत सनातनी वैदिक हो संघ शक्ति पहचानोगे ही
आर्य रक्त है तुम में बेशक फिर जन-मत की मानोगे ही
संघ प्रणेता राम-कृष्ण-अरिहंत-बुद्ध के अनुयाई हो
भीष्म-द्रोण-कृप-परशुराम जैसे अतुल्य जन-सुख-दाई हो
कर्ण न बनना दुर्योधन को गलत राह मत चलने देना
नहीं द्रोपदी दांव लगाना नारि धर्म मत छलने देना
जन-जन में परमात्म-तत्व का परम-नाद है सुनते जाना
शाहों ने जनता से सुलझाया विवाद है सुनते जाना
लोकतंत्र की मजबूती का शंखनाद है सुनते जाना

जनहित सर्वोपरि होता है जब तक राजा याद रखेगा
तब तक प्रजातंत्र के गौरव को निश्चय आवाद रखेगा
जयचंदो से पहले बचना यह आंगन की नागफनी हैं
वैसे भारत की धरती पर बहुतायत में शौर्य धनी हैं
अपने घर में स्वार्थ सिद्धि के साधक उन्हें नियंत्रित रखना
त्याग तपस्या से स्व-गेह को भलीभांति अभिमंत्रित रखना
राष्ट्र हितैषी बने आपको मिली दाद है सुनते जाना
शाहों ने जनता से सुलझाया विवाद है सुनते जाना
लोकतंत्र की मजबूती का शंखनाद है सुनते जाना
– नित्यानंद वाजपेयी “उपमन्यु”
गीता विहार कॉलोनी, पांचाल घाट, गंगाधाम
फतेहगढ़ फर्रूखाबाद (उत्तर प्रदेश)- 209601

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