vivratidarpan.com – मराठा साम्राज्य के 7वें पेशवा। 20 साल की उम्र में पेशवा बने। 20 साल राज किया। 40 बड़े युद्ध लड़े – सब जीते। दिल्ली में मुगल बादशाह के महल पर भगवा फहरा दिया। घोड़े की पीठ पर ही जिंदगी काटी। 39 साल की उम्र में नर्मदा किनारे देह त्यागी।
उपाधि :- “रणमार्तंड”, “अजेय योद्धा”, “दक्षिण का सिकंदर”
जीवन के 5 बड़े मोड़ – तलवार से कलम तक घटनाक्रम
1720 – 20 की साल की उम्र पिता बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु। छत्रपति शाहू ने पेशवा बनाया।सबसे युवा पेशवा। दरबार बोला “बच्चा है”, बाजीराव बोले “मैदान में मिलो”।
1728 – 28 साल की उम्र में – पालखेड का युद्ध – निजाम को बिना लड़े हराया।”गुरिल्ला युद्ध” का मास्टर स्ट्रोक। दुश्मन को पानी-रसद से काट दिया।
1737 – 37 साल की उम्र में – दिल्ली पर धावा– 500 किमी 10 दिन में। मुगल बादशाह लाल किले में छुपा।500 साल बाद पहली बार हिंदू फौज दिल्ली जीती। मराठा साम्राज्य अटक से कटक।
1739 – 39 साल की उम्र में – वसई की लड़ाई – पुर्तगालियों से वसई-ठाणे छीना। भाई चिमाजी अप्पा सेनापति।समुद्र पर मराठा ताकत। फिरंगियों को भगाया।
1740 – 39 साल की उम्र में – नर्मदा किनारे रावेरखेड़ी में बुखार से मृत्यु।घोड़े पर, तंबू में, युद्ध के मैदान के पास – योद्धा की मौत।
बाजीराव क्यों अजेय थे? 4 युद्ध-नीति में –
घोड़े की रफ्तार – बिजली: “दुश्मन को सोचने का वक्त मत दो”। 500 किमी 10 दिन में – आज भी मिलिट्री पढ़ती है।
गुरिल्ला + आमने-सामने : पहाड़ में छापा, मैदान में तोप। निजाम, मुगल, पुर्तगाली – सबको उनकी ही चाल में मात।
खुद सबसे आगे : पेशवा थे पर सिपाही की तरह लड़ते। 41 जख्म शरीर पर। सैनिक कहते – “राऊ आगे है तो मौत भी पीछे।”
दूरदृष्टि :कहा – “दिल्ली जीतो, हिंदुस्तान जीतो”। मुगल को कमजोर किया तभी अंग्रेज से लड़ने की जमीन बनी।
बाजीराव का दिल – मस्तानी और विवाद
मस्तानी बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल की बेटी। युद्ध में मदद के बदले छत्रसाल ने बाजीराव को मस्तानी दी।
प्यार की कीमत : पुणे के ब्राह्मणों ने विरोध किया। मस्तानी को महल में जगह न मिली। बाजीराव ने शनिवार वाड़ा के बाहर “मस्तानी महल” बनवाया।
बाजीराव का पक्ष : “लड़ाई जात-पात से नहीं, तलवार से जीती जाती है।” मस्तानी घुड़सवारी, युद्ध-कला जानती थी। दोनों साथ लड़े।
इतिहास की नजर : निजी जिंदगी विवादित, पर सैनिक और प्रशासक के तौर पर बेमिसाल।
शासन और समाज – सिर्फ योद्धा नहीं
राजधानी पुणे – :छोटे कस्बे से हिंदुस्तान की ताकत बनाया। शनिवार वाड़ा बनवाया।
राजस्व नीति :– “चौथ-सरदेशमुखी” से पैसा लाकर सेना मजबूत की, पर किसान को लूटा नहीं।
सर्वधर्म समभाव -: फौज में मुस्लिम सरदार, पुर्तगाली तोपची भी थे। लड़ाई सत्ता की थी, मजहब की नहीं।
पानी पर काम :- पुणे में कात्रज झील से नहर – 300 साल बाद भी पानी देती है।
वाजीराव पेशवा के पुण्यतिथि पर– जीवन गाथा
(“राऊ” – जिसने 40 युद्ध लड़े, एक भी नहीं हारा
जन्म: 18 अगस्त 1700 | मृत्यु: 28 अप्रैल 1740)
प्रस्तुति – अनमोल कुमार
