vivratidarpan.com – आजादी के बाद भारत सिर्फ एक देश नहीं, 562 रियासतों का टुकड़ा-टुकड़ा नक्शा था। अंग्रेज तो चले गए, पर हर राजा सोच रहा था – अपना अलग देश बना लूं।
तब एक आदमी ने धोती पहनी, बिना सेना, बिना युद्ध के, सिर्फ बातचीत, समझ और जरूरत पड़ी तो लौह संकल्प से 562 रियासतों को एक भारत में मिला दिया।
इसलिए उन्हें भारत का बिस्मार्क और लौहपुरुष कहा गया।
पटेल को क्यों याद करना जरूरी है?
एकता के शिल्पकार: हैदराबाद, जूनागढ़, कश्मीर जैसे सबसे मुश्किल केस पटेल ने संभाले।
किसान के बेटे, किसान के नेता: बारडोली सत्याग्रह में किसानों के लिए अंग्रेजों से टकराए, तभी से जनता ने उन्हें ‘सरदार’ कहा।
अनुशासन और स्पष्टता: नेहरू के विपरीत, पटेल बात घुमाते नहीं थे। कहते थे – “मंजिल पर पहुंचने के लिए रास्ते में भौंकने वाले हर कुत्ते को पत्थर नहीं मारा जाता।”
आज का प्रतीक – Statue of Unity: गुजरात में नर्मदा किनारे 182 मीटर की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति, उन्हीं की सोच की ऊंचाई को दिखाती है। आज के दिन 2014 से Run for Unity होता है – क्योंकि पटेल ने कहा था: – “इस देश की मिट्टी में कुछ खास है, जो लाखों बाधाओं के बावजूद हमेशा एकता की ओर लौटती है।”
बिहार हो या गुजरात, पटेल का संदेश एक ही है – भाषा, जात, धर्म अलग हो सकते हैं, पर हम पहले भारतीय हैं।
(31 अक्टूबर – लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती पर विशेष)
