यज्ञादि कर्म
नित्य करते चलें,
शुद्धता संग !!1!!
शास्त्रविहित
दान आहुति देते,
करें सत्कर्म !!2!!
सम्यक ज्ञान
दर्शन चारित्रय,
आचरण हो !!3!!
शुद्ध हृदय
पवित्रता रखते,
जीवन जीएं !!4!!
याज्ञिक तप
आध्यात्मिक होकर,
साधना करें !!5!!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान
