हे मातु अंबे राम को प्रेरित पुनः अब कीजिये।
संहार हर रावण करें यह प्रेरणा भर दीजिये।
है घोर कलयुग दानवों सम आज मानव हो रहा।
अब बोझ पापों का निरंतर शीश पर वह ढो रहा।
रघुवीर पुनि-पुनि जन्म लें माते सुनिश्चित कीजिये।
हे मातु अंबे राम को प्रेरित पुनः अब कीजिये।1
धरती सुरक्षित रह सके संसार के हर दुख टरें।
अवधेश सा कर आचरण जीवन सफल अपने करें।
करके दहन सब तामसी गुण सर्व मंगल कीजिए।
हे मातु अंबे राम को प्रेरित पुनः अब कीजिये।2
हर द्वेष और कलुष मिटे संस्कार पोषित हम करें।
कर नाश हिय की कालिमा सब दूर मन का तम करें।
नवमी विजय दशमी बड़े शुभ आप मंगल कीजिये।।
हे मातु अंबे राम को प्रेरित पुनः अब कीजिये।3
संसार फिर सुखमय बने वरदान इतना दीजिये।
हे मातु अंबे राम को प्रेरित पुनः अब कीजिये।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
