धूप दीप बतिया जगरतीया ये बालम,
माई के मनाइब बनी हम नचनिया ये बालम।
जगवा में माई मोर जगदम्बा ई कहाली
देव मानव से मईया मोर पूजाली
चला पूंजी माई के चरनिया ये बालम।
माई के मनाइब……।
भरी दा ये माई मोर खाली बा अंचरवा
होई जाइ उद्धार मोर डाली दा नजरवा
माफ करिहा माई मोर नदनियां ये बालम।
माई के मनाईंब…..।
अन्न धन भरल रहे बालक मोर अंगनवा।
राम जइसन दिहा माई बाँका मोर सजनवा।
आवा मिलके गाई माई के भजनिया ये बालम।
माई के मनाइब बनी हम नचनिया ये बालम।
धूप दीप बतिया जगरतिया ये बालम।
– श्याम कुंवर भारती ( राजभर)*
बोकारो, झारखंड , मॉब.9955509286
