vivratidarpan.com – भविष्य में शहरों को अब समुद्र की लहरों पर बसाया जाएगा। जापान के वैज्ञानिक ऐसे तैरते हुए प्लेटफार्म विकसित कर रहे हैं, जो कई किलोमीटर लंबे और चौड़े होंगे। ये प्लेटफार्म मुख्य भूमि से रेल और सड़क पुलों के जरिए एक-दूसरे से जुड़े होंगे।
शुरुआत में इन प्लेटफार्मों का उपयोग हवाई अड्डों, बंदरगाहों और फैक्ट्रियों के लिए होगा। आगे चलकर ये पर्यटन स्थलों के रूप में भी विकसित किए जाएंगे। इन पर फ्लोटिंग रेस्तरां, गोल्फ कोर्स और जलक्रीड़ा के शौकीनों के लिए तमाम सुविधाएं देने की योजना है। जापानी इंजीनियरों का कहना है कि इन समुद्री मंचों पर आवासीय और व्यापारिक परिसरों का निर्माण भी संभव होगा। तैरते प्लेटफार्मों के चारों ओर बांध बनाए जाएंगे, ताकि समुद्र के उतार-चढ़ाव से इन्हें बचाया जा सके।
जमीन की कमी बना कारण – जापान छोटे-छोटे द्वीपों का देश है। यहां जमीन की भारी कमी है। इसीलिए जापानियों ने तटवर्ती क्षेत्रों के आसपास समुद्र से जमीन रिक्लेम करने की कोशिश की थी, लेकिन अब पर्यावरणीय कारणों से समुद्र में और जमीन भरना संभव नहीं है। दूसरी ओर शहरों में जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं और बहुमंजिला इमारतों की भी एक सीमा होती है। ऐसे जापानी इंजीनियरों के पास एक ही रास्ता बचा था समुद्र की लहरों पर शहर बसाना। जापान का परिवहन मंत्रालय बड़े-बड़े प्लेटफार्मों के निर्माण को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित कर रहा है। इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए जापानी कंपनियों ने इस्पात कंपनियों के साथ मिलकर एक सिंडिकेट बनाया है। पहले प्लेटफार्म का काम शुरू हो चुका है, जो 2030 तक बनकर तैयार हो जाएगा।
भूकंपरोधी और विस्तार योग्य – जापानी द्वीपों को भूकंप का बड़ा खतरा रहता है, लेकिन वैज्ञानिकों का दावा है कि इन तैरते प्लेटफार्मों को भूकंप से कोई नुकसान नहीं होगा। इनका प्राकृतिक संतुलन पर भी विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। इन ढांचों की निर्माण विधि आसान और सस्ती है। यदि प्लेटफार्म पर आबादी बढ़ती है तो इसका विस्तार भी आसानी से किया जा सकेगा।
पहला प्लेटफार्म टोक्यो की खाड़ी में बनाकर समुद्र में उतारा जाएगा। जापानी इंजीनियर जी-जान से इस काम में जुटे हैं। देश के बड़े वैज्ञानिक और इंजीनियर इसकी सफलता को लेकर लगातार अध्ययन कर रहे हैं। विशाल समुद्री मंचों को लंगर डालकर कैसे सुदृढ़ता से स्थापित किया जाए, प्लेटफार्म समुद्र तल पर कैसे आगे बढ़ेंगे और छोटे-छोटे प्लेटफार्मों को कैसे जोड़ा जाएगा, इन सभी पहलुओं पर काम चल रहा है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि प्लेटफार्म की आयु लगभग 100 वर्ष होगी। पर्यावरणीय आकलन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी तकनीकी बारीकियों से संतुष्ट होने के बाद जापानी इंजीनियर एक बड़ा तैरता प्लेटफार्म विकसित करेंगे।
इस प्रोजेक्ट पर जापान पिछले 10 वर्षों से काम कर रहा है। इंजीनियर ऐसी धातु की तलाश में हैं जो 100 साल तक पानी में रहने के बावजूद जंग या अन्य नुकसान न झेले। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्लेटफार्म को खड़ा करने के लिए पहले छोटे-छोटे यूनिटों पर काम किया जाएगा, ताकि समुद्र में उतारते समय किसी तरह का खतरा न हो।
विश्व का पहला समुद्री शहर
निजी इस्पात कंपनियां इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सरकार को पूरा सहयोग दे रही हैं। जापान ने इसका सर्वे शुरू कर दिया है और समुद्र में जहाज दिन-रात काम कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट इतना ठोस और मजबूत होगा कि दुर्घटना की संभावना न के बराबर होगी।
इन मिनी शहरों की साफ-सफाई पर पूरा ध्यान दिया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी होगी। यदि जापान समुद्र में शहर बसाने में सफल होता है, तो वह विश्व का पहला देश बन जाएगा जिसने इतना बड़ा कारनामा किया हो। (विभूति फीचर्स)
