चलो छोड़ो भी – सविता सिंह

अभी मंजिल नहीं चाहत, सफर कुछ देर चल जाए,

पता चल जाएगा हमको, यहाँ पर कौन भटकाए,

करें मीठी सभी बातें, मगर पीछे न जाने क्या?

चलो छोड़ो अजी मीरा, समेटो जो यहाँ पाए।

 

जिसे समझे सदा अपना , यहाँ पर घाव देता है,

मगर दरिया सुनो जानम , नया इक मोड़ लेता है,

भरोसा अब किसी पर भी,नहीं हमको यहाँ करना,

समेटो हौसला मीरा, समय ही साथ देता है।

-सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर

 

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