दिल मेरा घिरता रहा यारा अजाबो से।
यार हमको तुम मिले हो अब नसीबों से।
आज भी वो सो रहे हैं शामियाने मे,
पूछता कोई नही छत भी गरीबो से।
प्यार सच्चे की दुआ उनकी भी हम माँगे,
आज भी डरते बड़ा इन फीके रिश्तों से।
प्यार मे डूबा,बना हूँ आज दीवाना,
कर गये घायल हमें कातिल निगाहों से।
आपने जो गजल भेजी थी मुझे वो कल,
सीख पाया मैं ग़ज़ल,गाता हूँ गीतो से।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
