लहू से सींच कर अपने शहीदों ने निखारा है।
हमारी जान से ज्यादा हमें ये देश प्यारा.है।
लगे प्यारा हमे भारत,जगत मे सबसे न्यारा है।
ये धोता पाँव पर्वत का नदी की गंग धारा है।
तिरंगा शान है अपनी,नही झुकने कभी देगें।
निछावर आज कर देगे सदा सदका उतारा है।
बचा कर आन तुम रखना नही डरना कि गैरो से।
बुलंदी पर हमेशा ही वतन रहता हमारा है।
यहां इंसानियत रहती,सभी के दिल मे अब भी।
हमारी जान से पहले हमे ये देश प्यारा है।
नही हम छैडते है,और न ही ललकारते हैं पर,
मगर सहते न दुश्मन की,वतन सारा हमारा है।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
