और माँ चली गयी – राधा शैलेन्द्र

  टूट गया विश्वास मेरा भ्रम सभी जाता रहा माँ कभी मर नही सकती मुट्ठी से फ़िसलती रेत की तरह माँ चली गयी दूर, बहुत दूर मुझसे!   जानती हूँ…

अब तो ललकारो – सुनील गुप्ता

  ( 1 ) वीर बहादुर ओ सैनिकों, अब उठो जागो और ललकारो  ! जाओ भेद डालो दुश्मन की छाती.., सीधे घर में घुसकर, उनको मारो !!   ( 2…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

  प्यार का गीत मिलकर सुनाएं चलो, दर्द दिल का सदा हम भुलाएं चलो।   ख्याब आँखो मे तुम अब सजाएं चलो, जश्र सब जन्मदिन का मनाएं चलो।   यार…

ॐ नमः शिवाय – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

  शंभु त्रिपुरारी करें नंदी की सवारी नित. अंग पे भभूति मलें कर त्रिशूल धारते।   तन पे न है दुशाला मात्र धारें मृग छाला कैलाश के वासी प्रभु हिम…

साथ थी – ज्योत्सना जोशी

बहुत से सवालों के जवाब नहीं हैं, बहुत सी खामोशी जेहन में बेताब थी।   और क्या श़र्त रखते राह-ए-इश्क़ में हम, मेरे ही रहना फ़क़त इतनी सी बात थी।…

कैसे कहूँ शुक्रिया माँ – राधा शैलेन्द्र

कैसे करुं शब्दों में बयां, तुम तो मेरी जीवन हो माँ मुझको दिया जीवन तुमने जी सकूँ इस योग्य बनाया तुमने कैसे कहूँ शुक्रिया माँ! जब भी भींगती है पलके…

डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ के काव्य संग्रह “आदित्यायन” की आठ पुस्तकों की श्रृंखला का विमोचन

vivratidarpan.com लखनऊ-  डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ विद्या वाचस्पति (काशी हिंदी विद्यापीठ) के काव्य संग्रह “आदित्यायन” की आठ पुस्तकों की श्रृंखला का और श्री ज्ञान प्रकाश मिश्र ‘ज्ञान’ की…

बहुत हो गया दिल जलाएँ – अनिरुद्ध कुमार

चोट खा दर्द कब तक छुपाएँ, आजकल गर्म हैं अब हवाएँ।   लोग पूछे बता क्या हुआ है, हाल बोलों किसे हम बताएँ।   दोस्ती पर भरोसा कहाँ अब, हाल…

कविता – सविता सिंह

उपालंभ आलोचना, मत करिए सरकार। कविता पढ़कर आप सब, देते रहिए प्यार।। मेरे शब्दों की छाँव तले कभी बैठ जरा क्षण दो क्षण, हृदय में उपजे भावों से सिञ्चित करती…

परशुराम – सुनील गुप्ता

  ( 1 )” प “, परमेश्वर भगवान श्रीपरशुराम, हैं श्रीविष्णु के छठवें आवेशावतार  ! सप्तऋषि जमदग्नि एवं रेणुका के सुपुत्र.., फरसा धनुष हैं इनके प्रिय शस्त्र हथियार !!  …