खोटी चवन्नी (बाल कहानी) – सुधाकर आशावादी

Vivratidarpan.com – बात उन दिनों की है जब बाज़ार में एक पैसा, दो पैसे, तीन पैसे, पाँच पैसे, दस पैसे , बीस पैसे, पच्चीस पैसे और पचास पैसे के सिक्के…

फोन के चार्जर में फंसी साहित्य की गरिमा (व्यंग्य) – विवेक रंजन श्रीवास्तव

vivratidarpan.com – एक ज़माना था जब साहित्य लिखा भी जाता था और पढ़ा भी। पाठकों को नई रचनाओं की प्रतीक्षा रहती थी, लेखक लेखन के प्रति गंभीर रहते थे, और आलोचना…

*स्वतंत्रता,शौर्य, स्वाभिमान और पराक्रम के प्रतीक : महाराणा प्रताप* – संदीप सृजन

vivratidarpan.com – महाराणा प्रताप का जीवन एक ऐसी प्रेरक गाथा है जो हर भारतीय को गर्व से भर देती है। उन्होंने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी और स्वतंत्रता…

कैसे कह दें बस तेरे हम – सविता सिंह

  सौ प्रतिशत मैं हूँ तुम्हारी कोई और बसे इस मन में जिसने दी यह सांसे मुझको वह भी शामिल इस धड़कन में| बेशक हमारे प्यार हो तुम छवि उनकी…

गद्दारी का साया – प्रियंका सौरभ

मुठ्ठी भर थे वो, फिर भी सदियों राज किया, अपनों की कमज़ोरी से, उन्होंने ये खेल रचा।   स्वर्ण भूमि पर, स्वार्थ का जाल बिछाया, लालच की जंजीरों से, हमको…

जय हिंद – सुनील गुप्ता

जय हिंद, जय-जय हिंद जय-जय, वीर सेना भारती वंदे मातरम, माँ दुर्गा भगवती  !!1!!   जय हिंद, जय-जय हिंद हिंद सेना, घुसकर मारती वंदे मातरम, चले ये सिंह पे हर्षाती…

शंखनाद गूंज रहा है – आर. सूर्य कुमारी

शंखनाद गूंज रहा है , जागो….जागो….जागो ।   यह विजय तिरंगा यात्रा है , कश्मीर से कन्याकुमारी तक । आंदोलित है जनमानस — इस दिशा से उस दिशा तक ।…

आरक्षण: पीढ़ीगत विशेषाधिकार या वास्तविक न्याय? – डॉ सत्यवान सौरभ

vivratidarpan.com – आरक्षण भारतीय समाज में सदियों से व्याप्त असमानताओं को समाप्त करने और वंचित समुदायों को मुख्यधारा में लाने का एक महत्वपूर्ण साधन है। लेकिन समय के साथ यह…

ठहरा छोर – ज्योत्सना जोशी

मोह की चिर वेदना का गीत अधरों पर सजाएं अनकही किसी बात पर वो मौन मंद सा मुस्कुराए भाव ठहरा रहा उर में यह पूर्ण पूरित सकल है शब्दों के…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

बनो क्यों चाँद रजनी के उगो बन सूर्य से भू पर । मिली क्या फूल की कीमत रहे हैं कीमती पत्थर ।   कभी सौंदर्य को तोलो नहीं बल के…