माँ भवानी – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

  अम्बे माँ जय भवानी अनुपम है कहानी, रूप अलौकिक देख भाव दिल में भरें।   दिव्यता बड़ी निराली भरें सदा झोली खाली, ममता की मूरत को भक्त नमन करें।…

दोहा (करजा) – अनिरुद्ध कुमार

  कर्ज जहर सम जान लें, जीना करें हराम। रूखा सूखा पान कर, जीवन में आराम।।   जो मानव ऋण में फँसा, सदा रहें हैरान। सबके नजरों से गिरे, खो…

मौसम मुस्काया – डा. अंजु लता सिंह

  नभ में मची हलचल,मचल उठे बादल- दल-बल संग कुपित हुए,बरसे हो पागल, झमाझम बरसीं आँगन में बूँदें- शाख़,फूल,पत्तों  पर उछलें और कूदें.   थिरक उठा कोने में रक्खा छाता…

कविता (स्वाद) – जसवीर सिंह हलधर

  पीतल का स्वाद उस ठठेरे को पता नहीं , जिसने जीवन भर पीतल को हथोड़े से पीट वर्तन बनाए हैं । यह स्वाद उस सैनिक को ही पता है…

दोस्त – जया भराड़े बड़ोदकर

  vivratidarpan.com – सामी और सपना दोनों बचपन के दोस्त थे साथ साथ स्कूल जाते,आते खेलते, खाते-पीते, और हमेशा साथ ही रहा करते थे। बड़े हुए तो कॉलेज भी साथ-साथ…

गीतिका – मधु शुक्ला

  प्रबल विरोधी, हों जब अपने , तय तब होते , कंटक मिलने।   कठिन परीक्षा, जीवन लगता, जब लग जाते , रक्षक डसने।   नरक हमारा , जीवन बनता,…

त्रिलोक – सुनील गुप्ता

  ( 1 ) ” त्रि “, त्रिलोकी ज्ञाता हैं नारदजी ईश्वर के परम भक्त.., और पुत्र कहलाए श्रीब्रह्माजी के  !! ( 2 ) ” लो “, लोक तीनों में…

भोजपुरी कजरी लोक गीत – श्याम कुंवर भारती

  सावन में भारती भइले बदनाम हो नजरिया से दूर कईलु सजनी।   लोगवा हमे तोहरे नाम से बुलावेला, प्रेमवा के लुगती हीया लहकावेला। बरसेले अंखियां शुबह शाम हो। नजरिया…

कितना विवस – नीलकान्त सिंह नील

  मैं कितना विवस हो चला हू, कि औंधे मुह ही गिर पड़ा हू शक्ति अब बाकी कुछ नहीं है उलझनों में उलझा पड़ा हू।।   ताकता हू जिधर भी…

नव अम्बु – ज्योत्सना जोशी

  अभी धरा पर नव अम्बु गिरे हैं उर की कोपल मनुहार करें तुम श्रृंगार ओढ़ मधुमास का नैनन में प्रिय घन विस्तार भरें। अभी धरा पर……… जगा कर प्रणय…