नभ में मची हलचल,मचल उठे बादल- दल-बल संग कुपित हुए,बरसे हो पागल, झमाझम बरसीं आँगन में बूँदें- शाख़,फूल,पत्तों पर उछलें और कूदें. थिरक उठा कोने में रक्खा छाता…
vivratidarpan.com – सामी और सपना दोनों बचपन के दोस्त थे साथ साथ स्कूल जाते,आते खेलते, खाते-पीते, और हमेशा साथ ही रहा करते थे। बड़े हुए तो कॉलेज भी साथ-साथ…
सावन में भारती भइले बदनाम हो नजरिया से दूर कईलु सजनी। लोगवा हमे तोहरे नाम से बुलावेला, प्रेमवा के लुगती हीया लहकावेला। बरसेले अंखियां शुबह शाम हो। नजरिया…