जब तू गले लगा – रुचि मित्तल

  तो जैसे रुक गया समय का बहाव जैसे हर दिशा ने थाम ली साँसें जैसे खुदा ने रख दी हों दो हथेलियाँ मेरे काँपते कंधों पर। जब तू गले…

स्वीकार करने का मन नही – अनुराधा पाण्डेय

  अब तुम्हें स्वीकार करने का हमारा मन नहीं है । धत! तुम्हारे प्रीत का हिस्सा रहे यह भूल जाना। पूर्व जीवन के कभी किस्सा रहे यह भूल जाना। नेत्र…

मैंने जूता जो उछाला तो … सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com – एक समय था, कि जब जूतम पैजार बड़ी हवेली में अधिक हुआ करती थी। जूते अधिक महंगे नहीं हुआ करते थे, तो पहनने के साथ साथ एक दूसरे पर…

वफादार – सुनील गुप्ता

  ( 1 ) ज़नाब संभलकर रहिए, इस ‘वफ़ादारी’, से  ! कई बार देखा है हमने…, वफादारों को, यहाँ धोखा देते  !!   ( 2 ) बहाव जरूरी नहीं, कि,…

बादल – रश्मि मृदुलिका

  आज बादल थम नहीं रहें हैं, घनघोर बरस रहें हैं, कौन विरही मन छलक पड़ा होगा, काले मेघों का क्रोध बरसा, आकाश के घात से बिखरा, विश्वास का झीना…

महकता गुलाब – अनिल भारद्वाज

तुम्हारे कांटे भी तुमको बचा न पाएंगे, इतना मत महको लोग तोड़ के ले जाएंगे। प्यारी सूरत पै तुम्हारी न रहम खाएंगे, तुम्हारे अश्क किसी को नजर न आएंगे, तुम्हारा…

ज्ञान का मान (दोहा छंद) – नीलांजना गुप्ता

  सदा जगत व्यवहार में ज्ञान का रखिए मान। भास्कर के उदय होत ही मिटे दीप अभिमान।।   ज्ञान जहाँ भी प्रकट हो मिट जाए सब क्लेश। त्रिगुण सम्पदा बसे…

गीतिका – मधु शुक्ला

  नयन नीर जिस जन को लगता,प्यारा है, वहीं जगत के दृग का बनता, तारा है।   सूख गया है जिसकी आंखों, का पानी, अपनों का अधिकार उसी ने, मारा…

तुम ही तो जीवन के सार – सविता सिंह

  लिख ली जब हमने पूर्ण किताब उसमें जिससे करती संवाद, उसको जब हमने पढ़ डाला हाय! हमने तुझको गढ़ डाला। शब्द शब्द हर आख़र आख़र कहता हर मुखड़ा औऱ…

हमारे राम – सुनील गुप्ता

  हमारे राम, सबके राम हैं संपूर्ण, धर्मज्ञ ज्ञानी  ! मर्यादा पुरुषोत्तम राम.., हैं इंद्रिय-संयमी !!1!!   हमारे राम, सबके राम हैं कल्याणकारी मुक्तिदाता ! ज्ञान के स्रोत अप्रतिम.., हैं…