कविता – जसवीर सिंह हलधर

जुड़े प्रकृति के संग ,कला के साधन सारे । इंद्र धनुष के रंग , दीखते न्यारे न्यारे ।। होता यही स्वभाव , प्रकृति के रूप निराले । मौसम के बदलाव…

दुःख की घड़ी में (लघुकथा)-  सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com – मास्टर जी का जब निधन हुआ, तो अर्थी को कन्धा देने के लिए चार कंधे भी नसीब नहीं हुए। कहने को उनका भरा पूरा परिवार था, किन्तु अड़ोसी…

बाल वाटिका’ बाल-साहित्य के क्षेत्र में सरस, स्नेहिल और संस्कारप्रद कृति – संजीव भटनागर

vivratidarpan.com – डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’ की ‘बाल वाटिका’ बाल-साहित्य के क्षेत्र में एक सरस, स्नेहिल और संस्कारप्रद कृति के रूप में उभरती है। यह पुस्तक न केवल बच्चों के…

स्मृतियों की दीमक – रेखा मित्तल

दीमक शायद पढ़ना जानती थी तभी चाट गई अलमारी में रखी किताबों को बहुत ही बेरहमी से ताकि कोई दोबारा उन्हें पढ़ न सके तुम कहते ही रहे पर पढ़…

मुक्तक –  मणि अग्रवाल

हमारी कोशिशों ने नित मिलन के मंत्र दुहराए, वफाओं ने हमेशा ही सुलह के फूल महकाए, तुम्हारे एक ग़म पर वार दी सारी खुशी अपनी- मगर फिर भी तुम्हें रिश्ते…

निमीलित मृण्मय नयन – सविता सिंह

जरा सुन सखे  इस निलय में, एक दीप प्रेम का जलाओ, बाती की भाँति जलूँ  प्रिये , बनकर शलभ तुम आ जाओ। निमीलित मृण्मय नयन में, हे मदन कुछ क्षण…

पतझड़ – मधु शुक्ला

  नव सृजन पतझड़ करे संसार में, भावना उपकार की आधार में।   वृक्ष के प्रति जब उदासी व्याप्त है, व्यस्त तब पतझड़ रहे शृंगार में।   जिंदगी की एक…

फिर भी वो हमारे हो नहीं सके – गुरुदीन वर्मा

सच्चे दिल से उनको बहुत प्यार किया, फिर भी वो हमारे हो नहीं सके। सच्चे दिल से उनका किया हमने आदर, फिर भी वो दोस्त हो नहीं सके।। सच्चे दिल…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

राही सभी  थक कर गिरे , चलती  रहीं  पगडंडियां । खलिहान ही उजड़े मिले ,महकी मिलीं सब मंडियां ।   जो काम उत्तम था कभी क्यों लाभ से वंचित हुआ…

काव्य संग्रह ‘जिंदगी है कट….ही जायेगी’- संजीव कुमार भटनागर

vivratidarpan.com-  सुधीर श्रीवास्तव की स्वरचित, प्रकाशित एकल काव्य–कृति ‘जिंदगी है कट ही जाएगी’ वैदिक प्रकाशन, हरिद्वार से प्रकाशित, अपने नाम के अनुरूप मानव जीवन के संघर्षों, अनुभूतियों और अंतर्मन की…