रजत संगम – डॉ निधि दीपिका बोथरा जैन

पच्चीस वर्षों का ये सफ़र, विश्वास का सार बना। साथ निभाते हुए इस राह में, अपनों संग घर बना। हर मौसम में दो हाथों का, यह अटूट साथ बना। प्रेम,…

दि ग्राम टुडे ई-पत्रिका ‘डा. अभि दा एक बहुआयामी व्यक्तित्व’ विशेषांक विमोचित

vivratidarpan.com गोरखपुर :  देव निर्माल्य साहित्यिक संस्थान के साहित्यिक पटल पर संस्थान तथा दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 12 फरवरी को रात्रि 8:30 बजे दि…

हमरे गँउआ के पहचान – अनिरुद्ध कुमार

रुनझुन रुनझुन होत विहान। आसन-बासन मुसकी जान। लीपा पोती मनहर गान। कूटा, पीसी,जाँत,पिसान। चूल्हा चौकी भोग बिधान। हमरे गँउआ के पहचान।।   घरसे फरका दूर बथान। मालजाल गोती गोतान। ले…

बारी बरसी खटन गया सी (व्यंग्य) –  विवेक रंजन श्रीवास्तव 

vivratidarpan.com – बारी बरसी खटन गया सी…ये गीत पंजाब के उस मेहनतकश इंसान का लोक गीत है, जो बारह साल परदेस में कमाकर लौटा है। हर बार उसकी झोली में कुछ…

ग़ज़ल (भोजपुरी) – श्याम कुंवर भारती

जे भी डुबल उ पावल पौरे वाला का पाई। जे गावल उ भावल रोवे वाला का पाई।   आवे जे दुनिया में लड़े के पड़ेला जीनगी से। जे लड़ल ते…

ग़ज़ल – विनोद निराश

उनकी अदाओ पर हम मरते गए, छुप-छुप के दीदार हम करते गए। देख कर उनकी बेरुखी को यारो, कभी उफ्फ कभी आहे भरते गए। उनकी तंगदिली की बात क्या? सितम…

इज़हार करेंगे – सुनील गुप्ता

( 1 ) इज़हार करेंगे सदा ही, प्रेम-प्यार का तुम्हारा !! ( 2 ) इक़रार है तुमसे ही, था यही वादा हमारा !! ( 3 ) तकरार प्रेम संबंधों में,…

सदा शीश ऊँचा हो तेरा – सुधीर श्रीवास्तव

दस जनवरी दिवस है आया। मात -पिता का मन हर्षाया।। अनुजा दिव्या है मुस्काई। मगन बहुत हैं सुधीर भाई।। जीवन पथ पर आगे रहना। हम सब कहते हैं बस इतना।।…

चौपाई – सुधीर श्रीवास्तव

तुमने जब है रंग दिखाया। बड़ा मज़ा मुझको है आया।। पर हमको दुख बहुत हुआ है। कल होना वो आज हुआ है।। आखिर तुमको क्या कहना है। धार इसी कब…

राह  न  सूझे कोई –  मीनू कौशिक

विकट  दौर  है , विचलित  युवा , राह  न  सूझे कोई । पढ़-पढ़  पोथी , लिखें परीक्षा , जग-जग  राते खोई । चड्ढा  चाटे  चाट  मलाई ,  माधो  आलू  को…