जोगीरा सा रा रा रा रा….. – कविता बिष्ट ‘नेह’

रंग बसंती चढ़ा हुआ है, मस्ती में अब झूम। कर ले अपने सपन सलोने, गली मची है धूम।। जोगीरा सा रा रा रा रा….. पग मेरे यूँ बढ़ने लगते, दिखा…

जीतने वाले की सदा ही जय जय (व्यंग्य) – सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com – हिचकोले खाते खाते आखिर नैया पार हो ही गई और भारत फटाफट क्रिकेट का चक्रवर्ती सम्राट बन गया। क्रिकेट और हॉकी में यही अंतर है, कि हॉकी बाई प्रैक्टिस…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

बात दिल की कहे मुस्कुराते हुए। राज दिल का कहे गुनगुनाते हुए।।   होश उसने उड़ाये अदा से बड़े। जाम मस्ती का अपने पिलाते हुए।   दर्द दिल का सभी…

भोजपुरी होली गीत – श्याम कुमार

नायक _ कहा कईसे खेलब तोहरा संग होलिया हे जान, लिहले बानी भरी के आपन रंग झोरिया हे जान । नायिका _  कईसे आई राजा घरवा चले ना बहाना। देखिहे…

फागुन के रंग – सविता  सिंह

कितनी बीती पूस की रातें, कितने स्वप्न बसंत के, याद दिलाती हर फागुन वो, अंतरमुखी प्रिय उस कंत के। पीली सरसों, पीत अमलतास, बिखरे धरा पर रक्तिम पलाश, हर रंगोत्सव…

बुरा न मानो, होली है – सुनील गुप्ता 

( 1 )कोई बुरा न मानें, होली है…, हमने अपनों संग खेली होली है !! ( 2 ) चोरी नहीं ये सीनाजोरी है…, भरी पिचकारी रंगों की डाली है !!…

गंगांजलि साझा संग्रह समाजसेवी लालचंद पाण्डेय को भेंट किया – कवि संगम त्रिपाठी

vivratidarpan.com जबलपुर – गंगांजलि साझा काव्य संग्रह समाजसेवी लालचंद पाण्डेय कौशांबी को कवि संगम त्रिपाठी ने भेंट किया। गंगांजलि साझा काव्य संग्रह के संपादक डॉ अजय शुक्ल है व इस…

यह फागुन मास बहार लगे – अनिरुद्ध कुमार

यह फागुन मास बहार लगे, हुक प्रेम उठे चितकार लगे। मन रंग सजा हर नार लगे, यह बाहर भीतर प्यार लगे। झकझोर हवा गुलनार लगे, हर फूल कली कचनार लगे।…

आया होली का त्यौहार – हरी राम यादव

धरती धानी रंग में सजी हुई, धारे लाल रंग का बंदनवार। ढाख पलास रंगबाज बने, कनक झूमे हरी संग बयार। आया होली का त्यौहार।। मन मगन हो कोयल गा रही,…

भोजपुरी होली गीत – श्याम कुंवर भारती

हे छलिया भागी पराइल कहा चढ़ले फगुनिया ना । कब से देखे छछनाइला मंद मुस्कनिया ना। तू त कही के गइला कान्हा, हम त हाली लौटी आइब राधा । एही…