उदासी क्यूँ अरे मन देख, पतझर बीत जायेगा। लिए झोली भरी रँग की, पुनः मधुमास आयेगा।। गिरेंगी पत्तियाँ सूखी, नवल तरु को सजायेंगी। नया धर रूप शाखों पर, कली फिर…
अद्भुत है परिवेश, धरा की शोभा न्यारी। वसुधा कर शृंगार, लगे सब को अति प्यारी।। मद्धम मद्धम धूप, हवा भी चले सुहानी। देख मौसमी रंग, भ्रमर करते मनमानी।। <> शारदे…