मेरी कलम से – डॉ क्षमा कौशिक

उदासी क्यूँ अरे मन देख, पतझर बीत जायेगा। लिए झोली भरी रँग की, पुनः मधुमास आयेगा।। गिरेंगी पत्तियाँ सूखी, नवल तरु को सजायेंगी। नया धर रूप शाखों पर, कली फिर…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

धूप कारागार में नकली उजाले रह गए । हाशिए पर आम जनता के हवाले रह गए ।   बात थी अधिकार के उपयोग की मतदान में , पर यहां तो…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

आज मिलता है कहाँ सब कुछ नसीबों से। करनी पढती है मशक्कत आज लोगों से।   चाँद भाता आज भी अपनी अदाओ से। खूबसूरत  वो लगे  हमको निगाहों से।  …

मेष संक्रांति – सुनील गुप्ता

( 1 ) है पुण्यकारी मेष संक्रांति पर्व., मंगलकारी !! ( 2 ) यह संयोग शिववास का योग., जगाएं जोग !! ( 3 ) करें प्रार्थना सूर्य की उपासना., ध्यान…

भोजपुरी होली – श्याम कुमार

बतिया न बनईह गोल गोल हे पिया होलिया में अईह ।   बाली उमरिया हो नाजुक बदनिया बहेले फगुनी बयार हमरी ओर हे पिया होलिया में……।   अइले फगुनवा हो…

कुछ बातें अनकही – वैशाली रस्तोगी

कुछ बातें अनकही हैं, फिर भी बड़ी सही हैं, खामोशियों की राहों में, यादें वहीँ बसी हैं। नज़रों ने जो कहा था, लफ़्ज़ों ने ना कहा है, दिल की किताब…

होली – डा. इंदु अग्रवाल

दहन होलिका करके सारे, खेल रहे हैं फाग । शायर सब प्रेमिल धुन में , गा रहे होली राग ।।   छन्न पकैया छन्न पकैया छन्न के ऊपर चंदा। अगला…

भोजपुरी झूमर होली गीत – श्याम कुमार

मोरे नइहरवा भईया भतीजवा भला हो कन्हईया लाल। भरल नइहरवा बड़ा सोहाय भला हो कन्हइया लाल।   फागुन के महीनवा नइहर हम गईली भला हो कन्हइया लाल पिया बिना तनको…

मेरी कलम से – डॉ क्षमा कौशिक

अद्भुत है परिवेश, धरा की शोभा न्यारी। वसुधा कर शृंगार, लगे सब को अति प्यारी।। मद्धम मद्धम धूप, हवा भी चले सुहानी। देख मौसमी रंग, भ्रमर करते मनमानी।। <> शारदे…

होली – सविता सिंह

ये होली भी बीत गयी, शाम गुलाबी कर गयी। भीगे मन के आँगन में यादों की खुशबू भर गयी। रंगों में डूबे वे क्षण सब, हँसी ठिठोली के पल सब।…