vivratidarpan.com देवबंद — गुरूद्वारा श्री गुरूनानक सभा में शहीदों के सरताज पांचवे पातशाह साहिब श्री गुरू अरजन देव जी का शहीदी पर्व श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। संगत ने गुरवाणी कीर्तन के बाद राहगीरों को मीठा शरबत पिलाकर गुरू जी की शहादत को नमन किया। महिला सुखमणि सेवा सोसाइटी द्वारा बीते 40 दिनों से किए जा रहे श्री सुखमणि साहिब के पाठों की लड़ी का भी समापन हो गया।
गुरूद्वारा साहिब में संगत को सम्बोधित करते कमेटी के प्रधान सेठ कुलदीप कुमार ने कहा कि गुरू अर्जुन देव जी का जन्म चौथे गुरू रामदास जी व माता भानी जी के घर 1563 ई. को हुआ था। गुरू जी ने आदि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी का सम्पादन कर श्री हरमंदिर साहिब में गुरू ग्रंथ साहिब का प्रकाश कराया।
ज्ञानी धर्म सिंह ने कहा कि मुगल सम्राट जहांगीर गुरु जी की बढ़ती लोकप्रियता और उनके विद्रोही पुत्र शहजादे खुसरो की सहायता करने से नाराज था। जहांगीर ने गुरु जी को इस्लाम कबूल करने या मौत की सजा चुनने का आदेश दिया। गुरु जी ने धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। उन्हें पांच दिनों तक असहनीय यातनाएं दी गईं।उबलते पानी में बैठाया गया और जलती हुई रेत उनके ऊपर डाली गई। 30 मई 1606 को उन्होंने लाहौर में रावी नदी के किनारे अपने प्राण त्याग दिए। इससे पूर्व श्री सुखमणि साहिब के पाठ के बाद गुरबाणी कीर्तन किया गया। इस दौरान गुरजोत सिंह सेठी, हर्ष भारती, बलदीप सिंह, सचिन छाबड़ा, राजपाल सिंह, हर्षप्रीत मनचंदा, दिनेश ऋषि, युवराज सिंह, मानव सिंह, सन्नी-मन्नी सेठी, अमृत सिंह, विस्मित सिंह, अमनदीप सिंह, अर्जुन गाबा, कैप्टन कपूर, प्रिंस कपूर, हैरी सिंह, तनिष्क अरोड़ा आदि मौजूद थे। रिपोर्टर — महताब आज़ाद
