साहित्य जगत का अनमोल नाम रमेश चंद्र महेश्वरी – कुमार संदीप

vivratidarpan.com बिजनौर  – बिजनौर की साहित्यिक धरती को गौरवान्वित करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार रमेश चन्द्र माहेश्वरी “राजहंस” आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ग्राम गंज दारानगर की पावन भूमि पर जन्मे रमेश ने व्यापारिक जीवन के साथ-साथ साहित्य साधना को भी निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। पिछले 42 वर्षों से “माहेश्वरी क्लॉथ हाउस” के माध्यम से वस्त्र व्यवसाय से जुड़े रहने के बावजूद उनकी लेखनी समाज में संवेदना, संस्कार और मानवीय मूल्यों की ज्योति जलाती रही। हास्य-व्यंग्य, गीत, दोहा, गीतिका एवं लघुकथा जैसी विविध विधाओं में उनकी रचनाएँ लोगों के हृदय को स्पर्श करती हैं।
आकाशवाणी नजीबाबाद एवं दूरदर्शन देहरादून पर काव्य प्रस्तुति देने वाले रमेश माहेश्वरी “राजहंस” को हाल ही में मुंबई (ठाणे) में आयोजित कवि सम्मेलन में भी सम्मानपूर्वक काव्य पाठ का अवसर प्राप्त हुआ। वर्ष 2003 में प्रकाशित उनकी पुस्तक “मोती से आँसू” उनकी संवेदनशील साहित्य साधना का जीवंत प्रमाण है।
रमेश जी वास्तव में उन साहित्य साधकों में हैं, जिन्होंने अपनी सरलता, सृजनशीलता और भावपूर्ण लेखनी से समाज में साहित्य एवं मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने का प्रेरणादायी कार्य किया है।

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