वैद्यनाथ का धाम मनोहर, सब दर्शन को आते हैं।
सम्मुख नौवें ज्योतिर्लिंग के, मन से शीश नवाते हैं।
ले शिवलिंग चला जब रावण, बैजनाथ को सौंप दिया,
प्रभु लीला से रखा भूमि पर, वहीं अचल हो जाते हैं।
वैद्यनाथ के साथ बना है, शक्तिपीठ मां अंबे का।
सावन के मेले में लाते, कांवड़िए जल गंगे का।
दिव्य धाम इस जैसा कोई, भारत भर में और कहाँ?
शिव दर्शन के साथ करें सब, दर्शन माँ जगदंबे का।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
