आचार्यकुल संगीति गोरखपुर 2026: संकल्प, समन्वय और सृजन का दिव्य संगम

vivratidarpan.com  गोरखपुर। आध्यात्म, विज्ञान और सामाजिक समन्वय के व्यापक उद्देश्य को आत्मसात करते हुए आचार्यकुल संगीति गोरखपुर 2026 का भव्य आयोजन 10 एवं 11 अप्रैल को विश्वकर्मा मंदिर धर्मशाला, गोरखपुर में संपन्न हुआ। आचार्यकुल एवं श्री दीप साहित्य संगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामयी संगीति का आयोजन आचार्यकुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य धर्मेंद्र जी के नेतृत्व एवं प्रख्यात साहित्यकार अभय ज्योति ‘जिज्ञासु’ के संयोजन में किया गया।
इस दो दिवसीय आयोजन में शिक्षा शास्त्री, समाजसेवी, साहित्यकार, पत्रकार, कवि, खादी एवं ग्रामोद्योग तथा भूदान से जुड़े समर्पित 47 प्रतिभागियों ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य आचार्यकुल को सशक्त बनाना, अध्यात्म एवं विज्ञान के समन्वय को प्रोत्साहित करना तथा ग्राम सभा सहयोग अभियान को सफल बनाना रहा।
प्रथम दिवस आचार्यकुल की अवधारणा पर गहन चिंतन हुआ, जिसमें वर्तमान सामाजिक समस्याओं एवं उनके समाधान में आचार्यकुल की भूमिका को रेखांकित किया गया। रात्रिकालीन सत्र में एक सजीव काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें देश के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनाओं से वातावरण को रसपूर्ण एवं भावप्रवण बना दिया।
द्वितीय दिवस संगठनात्मक मंथन एवं रचनात्मक निर्णयों का साक्षी बना। उपस्थित महानुभावों ने आचार्यकुल के सदस्य बनने की सहमति प्रदान की, जिसमें तीन वार्षिक एवं दो आजीवन सदस्य नामित किए गए। यह संगीति केवल विचार-विनिमय तक सीमित न रहकर ठोस संगठनात्मक विस्तार की दिशा में अग्रसर हुई।
संगीति में राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय रही, जिनमें पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राजेश द्विवेदी, वर्तमान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. सिंह, सहमंत्री प्रेमनाथ गुप्ता, डॉ. नरेन्द्र राय, नैसर्गिक कृषि के राष्ट्रीय प्रभारी राजपाल मिश्र तथा युवा संगठन के राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश मिश्र प्रमुख रहे। इनके सक्रिय मार्गदर्शन एवं प्रेरक विचारों ने आयोजन को नई दिशा प्रदान की।
प्रदेश संयोजक अनोखेलाल यादव की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। गोरखपुर प्रक्षेत्र से वरिष्ठ साहित्यकार चन्द्र गुप्त वर्मा ‘अकिंचन’, दिनेश गोरखपुरी, नन्दलाल मणि त्रिपाठी, मुक्तिनाथ त्रिपाठी, अभय ‘ज्योति-जिज्ञासु’, शशि प्रभा श्रीवास्तव, निशा पासवान, वंदना चन्द्रवंशी एवं खादी सेवक उमाकांत तिवारी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
अन्य जनपदों से पधारे विशिष्ट अतिथियों में डॉ. शिवनाथ सिंह शिव (रायबरेली), इन्द्रेश भदौरिया (रायबरेली), यमराज मित्र सुधीर कुमार श्रीवास्तव (गोण्डा), डा. रमेश सिंह (प्रयागराज), ईश्वर चन्द्र विद्यासागर (संत कबीरनगर), रामबिलास त्यागी (चंदौली) आदि शामिल रहे। उत्तराखंड से डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय एवं बिहार से दामोदर दास की उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
विचार-विमर्श के उपरांत सर्वसम्मति से महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए
गोरखपुर मंडल के सभी जिलों के संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण हेतु नन्दलाल मणि त्रिपाठी को संयोजक नियुक्त किया गया। संयोजन समिति में चन्द्र गुप्त वर्मा ‘अकिंचन’, दिनेश गोरखपुरी, मुक्तिनाथ त्रिपाठी, अभय कुमार श्रीवास्तव ‘ज्योति-जिज्ञासु’, शशि प्रभा श्रीवास्तव, वंदना चन्द्रवंशी एवं निशा पासवान को सदस्य नामित किया गया तथा समिति विस्तार का अधिकार संयोजक को प्रदान किया गया।
उत्तर प्रदेश स्तर पर आचार्यकुल को संगठित करने हेतु गांधी-विनोबा परंपरा के प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. शिवनाथ सिंह शिव को संगठन प्रभारी का दायित्व सौंपा गया, साथ ही उन्हें शीघ्र ही समस्त जनपदों में संयोजक नियुक्त कर केंद्रीय निर्देशन में उत्तर प्रदेश आचार्यकुल अधिवेशन आयोजित कराने हेतु अधिकृत किया गया।
संगीति के व्यवस्थापक एवं प्रख्यात साहित्यकार अभय ज्योति ‘जिज्ञासु’ को ट्रस्टी नामित किया गया। वहीं, गोरखपुर में आचार्यकुल कार्यालय के लिए मुक्तिनाथ त्रिपाठी द्वारा निःशुल्क भवन प्रदान करने की घोषणा इस आयोजन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही, जहाँ शीघ्र ही संगठनात्मक कार्यों का शुभारंभ किया जाएगा।
अंत में आचार्यकुल के अध्यक्ष आचार्य धर्मेन्द्र के प्रेरणादायी उद्बोधन एवं मंगलकामनाओं के साथ यह संगीति सफलतापूर्वक संपन्न हुई। सभी उपस्थित महानुभावों ने उत्कृष्ट व्यवस्था हेतु आयोजक मंडल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
यह संगीति केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि विचार, साधना और संगठन के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक सशक्त संकल्प बनकर उभरी—एक ऐसा संकल्प, जो आने वाले समय में आचार्यकुल की शक्ति और प्रभाव को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का आधार बनेगा।

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