विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर आभासी कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

vivratidarpan.com झारखंड – कहानिका झारखंड अध्याय द्वारा आयोजित गूगल मिट पर आभासी आंग्ल नव वर्ष व विश्व हिंदी दिवस पर एक गोष्ठी आयोजित हुई। देश भर के रचनाकारों का संयोजन के लिए आदरणीय श्याम कुमार भारती की अभिनंदन के पात्र हैं। काहनिका पत्रिका के डिजीटल अंक का विमोचन मनीषा सहाय द्वारा पटल पर किया गया।. मुख्य अतिथि के रूप में शिखा गोस्वामी निहारिका रही।
गोष्टी कई रंगों से सजी हुई थी कहीं वीर रस का प्रवाह हुआ, तो कहीं लोक संगीत लोक भाषा के गीतों का प्रवाह रहा, कहीं हिंदी का गुणगान हुआ तो कहीं भोजपुरी का बखान हुआ, और साथ में झारखंड की खोरठा भाषा में भी रचना की प्रस्तुति ने तो विविधता से सजी रंगोली को पूर्णता प्रदान किया।
सर्वप्रथम गणेश वंदना रेनू बलाधर के सुंदर स्वर में प्रस्तुत की गई उसके तत्पश्चात मधुमिता सहाय द्वारा सुंदर शब्दों में मां वाणी की वंदना प्रस्तुत की गई तत्पश्चात गोष्ठी के आरंभ में आदरणीय भारती द्वारा स्वागत उद्बोधन हुआ इसके पश्चात अतिथियों का आशीर्वचन भी लिया गया।
इनके अतिरिक्त गोष्ठी में पुष्प पांडे ने हिंदी दिवस पर अपनी रचना प्रस्तुत की गांव की गलियों से चलकर गया देश-विदेश सरल सहजता से पाया हिंदी ने विश्व प्रवेश प्रस्तुत की। सिम्मी नाथ हिंदी और नारी की तुलनात्मक व्याख्या करते हुए उसकी उपेक्षा पर गहरी संवेदना व्यक्त करती हुई कविता का पाठ किया।
उसके बाद उर्मिला सिंह ने समय की मेहता बताते हुए घड़ी की उपयोगिता नियत समय पर सोना 24 घंटे के दिन रात चक्र पर अपनी रचना प्रस्तुत की
उसके तत्पश्चात मांगीलाल ने ओज रस से परिपूर्ण शस्य श्यामला सुजलाम शुफलाम, वंदन यह है, प्रस्तुत की जिसमें सभी राज्यों का सुंदर वर्णन व्याख्या शामिल थी। उसके बाद दिवाकर पाठक ने शुभ मंगल का मंगल आया, नूतन वर्ष का दीप जलाए, नव वर्ष का बिगुल बजाया सुंदर रचना द्वारा आंग्ल नव वर्ष का हार्दिक अभिनंदन प्रस्तुत किया। उसके पश्चात प्रतिभा प्रकाश ने जब दिनकर होले से मुस्कुराए मकर बिंदु पर, उसके पश्चात उन्होंने एक अन्य रचना भी प्रस्तुत की कुछ पाठ जो तुमने भुला दिए बहुत सुंदर सार्थक प्रस्तुति
फिर रेनू बलाधर ने दिन सप्ताह महीने बीते बीत गया एक साल मुबारक हो नया साल मुबारक हो। कल्पना कुमारी ने ऑपरेशन सिंदूर पर ओज रस में प्रस्तुति प्रदान की जिस पर सभी झूम उठे.
तत्पश्चात शीला तिवारी ने ‘हिंदी की अपने ही घर में ह क्यों पराई है। फिर ताराचंद्र महतो ने खोरठा भा भाषा में अपनी रचना प्रस्तुत दी रजनी कटारे ने भगवान राम पर अपनी प्रस्तुति थी राम जहां हो होता वही सुखधाम बहुत सुंदर उन्होंने एक पूर्णिका भी प्रस्तुत की लफ्जों का कमाल देखिए
मीना अग्रवाल ,निराला ,सत्येन्द्र ,शीला तिवारी और भी कई रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां प्रदान की ,संचालन मधुमिता ने किया। विशिष्ट अतिथि के कर्णल मनमोहन ठाकुर ने सभी का अभिनंदन किया । अंत में निराला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया! सुंदर सार्थक आयोजन की सभी को सहस्त्र बधाइयां ,
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