vivratidarpan.com – विश्व पटल पर कोई भी घटना घटित हो, उसका सीधा असर भारत के नागरिकों पर पड़ता है। ईरान, अमेरिका, इजरायल युद्ध ने कच्चे तेल की कीमतों पर असर डाला, जिसका असर आम भारतीय पर शायद उतना नहीं पड़ा, जितना कि राजनीतिक दलों पर पड़ा। राजनीतिक दलों को सरकार पर निशाना साधने और सरकार को कमजोर सिद्ध करने के लिए बयानबाजी का अवसर मिल गया। मुनाफाखोरी करने वाले तत्वों ने अफवाह फैलाकर आम आदमी की जीवन चर्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पेट्रोलियम पदार्थों व रसोई गैस के प्रति अधिक चिंता में डाल दिया, कि जगह जगह पर गैस एजेंसियों तथा पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई। जो थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
युद्ध एवं आपदा काल में अवसरवादी तत्वों द्वारा आपदा में अवसर का लाभ उठाने की प्रवृत्ति भारतीयों की रही है। घटना कहीं भी घटित हो, उसकी प्रतिक्रिया भारत के पंथ निरपेक्ष राष्ट्र में होती रही है। राष्ट्र को अस्थिर करने वाली अराजक शक्तियां भीड़ को उकसा कर देश में अव्यवस्था फ़ैलाने का प्रयास करती हैं तथा सरकार बचाव की मुद्रा में खड़ी रहने तथा अराजक तत्वों की हरकतों पर अंकुश लगाने का प्रयास करने हेतु विवश रहती है। बहरहाल सियासी दलों और उनके समर्थकों की यह नकारात्मक सोच देश के प्रति उनकी दुर्भावना का परिचय देती है तथा उनके राष्ट्र के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण का खुलासा करती है। जबकि घर, परिवार और राष्ट्र की समृद्धि में अपेक्षित सहयोग प्रदान करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य व दायित्व होता है। यदि कहीं अव्यवस्था हो रही हो, तब उस अव्यवस्था को दूर करने हेतु आम नागरिक का एकजुट होकर सहयोग अपेक्षित रहता है। विडंबना है, कि समस्या से निपटने की बजाय व्यवस्थापकों पर सवाल खड़े करना अराजक तत्वों की आदत बन चुकी है। ऐसे में आवश्यक है, कि आम आदमी अफवाहों पर ध्यान न दे तथा मुनाफाखोरों के मंसूबों को ध्वस्त करने में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करे।
ईरान प्रकरण में अपने घर में ईंधन भरने की आपाधापी में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और पेट्रोलियम पदार्थों की जमाखोरी के अनेक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रचारित हैं, जो आग में घी का काम कर रहे हैं। ऐसे में सरकार कहाँ कहाँ अफवाहबाजों पर कार्रवाई करे, यह विचारणीय बिंदु है। ऐसे में व्यवस्था पर नाकामी का ठीकरा फोड़ने से पहले क्यों न सभी नागरिक अपने नागरिक दायित्वों से परिचित हों तथा देश को सर्वोपरि मानते हुए किसी भी संकट से निपटने के लिए देश के साथ खड़े हों ? यह चिंतन और इसके आधार पर राष्ट्र का सहयोग प्रत्येक नागरिक का प्रथम दायित्व होना अपेक्षित है। (विभूति फीचर्स)
