रंगों में छुपा प्यार – रोहित आनंद

फागुन की आई मधुर बहार,
रंगों से सजा है सारा संसार।
नदी किनारे बैठी राधा प्यारी,
मन में छुपाए प्रीत हमारी।

जल में देखे श्याम की छाया,
नीले रंग में प्रेम समाया।
ऊपर साधारण सी मुस्कान,
भीतर बसते कान्हा भगवान।

होली के रंग कहें यह बात,
सच्चा प्रेम नहीं देखे जात।
सूखी धरती, गीला मन,
रंग दे प्रीत का हर एक क्षण।

गुलाल उड़े जब प्रेम के संग,
भीग जाए मन, मिटे हर जंग।
राधा-श्याम का पावन मेल,
जैसे रंगों का सुंदर खेल।

इस होली बस इतना उपहार,
दिल से दिल का हो सत्कार।
रंग नहीं, विश्वास लगाओ,
प्यार से जग को रंगते जाओ।

  • रोहित आनंद, बांका, बिहार, डी. मेहरपुर

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