रंगीला भंवरा – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

रंगीला भंवरा पंख पसारे, फूलों संग मुस्काता है,
रंग-बिरंगी दुनिया में वह, मधुर राग सुनाता है।
कभी गुलाब की गोद में झूले, कभी कमल से बतियाए,
मधु की मीठी बूंदों में वह, अपने सपने सजाए।
धूप की किरणों संग नाचे, छांव में विश्राम करे,
हर बगिया की हर डाली से, अपना गहरा काम करे।
काली-पीली उसकी छाया, नभ में चित्र बनाती है,
हर उड़ान में उसकी मस्ती, मन को भाती जाती है।
कांटों से भी ना घबराए, फूलों का ही साथी है,
छोटी-सी इस जीवन-यात्रा में, खुशियों का वह रथी है।
हवा के संग खेलता-गाता, गीत अनोखे गुनगुनाए,
हर पंखुड़ी से प्रेम की भाषा, धीरे-धीरे समझाए।
ना कोई बंधन, ना कोई डर, बस उड़ने की चाह रखे,
हर दिन को उत्सव बना ले, मन में नई राह रखे।
प्रकृति का वह सच्चा दूत है, रंगों का संदेशा लाए,
रंगीला भंवरा हर दिल में, जीवन की ज्योति जलाए।
– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव,जगदलपुर राजिम, छत्तीसगढ़

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