मानव का अधिकार कहाँ है? – अनिरुद्ध कुमार

वादों का बौछार यहाँ है।

संसद में तकरार यहाँ है।

भूख गरीबी छाती पीटे,

हर कोई लाचार यहाँ है।

मानव का अधिकार कहाँ है?

 

ऊंचा, नीचा  बोल रहें सब,

समता का चितकार यहाँ है।

जातपात की गंगा बहती,

मारधाड़ तकरार यहाँ है।

मानव का अधिकार कहाँ है?

 

स्वतंत्रता कहनें की बातें,

हर बातों में रार यहाँ है।

कमजोर वर्ग करें गुलामी,

प्रचलित यह संस्कार यहाँ है।

 

मानव का अधिकार कहाँ है?

गली गली होता नित शोषण ,

लोभ लाभ आधार यहाँ है।

बोल सके ना चुप रहते सब,

होता भ्रष्टाचार यहाँ है।

मानव का अधिकार कहाँ है?

 

शिक्षा का दरकार यहाँ है।

विद्यालय बीमार यहाँ है।

कौड़ी कौड़ी मोल रहें सब,

ट्यूशन का बाजार यहाँ है।

मानव का अधिकार कहाँ है?

 

कानूनी उपचार कहाँ है।

भेदभाव हर बार यहाँ है।

बाहुबली की तूंती बोले

धनवानों से प्यार यहाँ है।

मानव का अधिकार कहाँ है?

 

जनतंत्र अधिकार से वंचित,

जीत हार हर बार यहाँ है।

कोई नहीं है देखने वाला,

सुरक्षित सरकार यहाँ है।

मानव का अधिकार कहाँ है?

-अनिरुद्ध कुमार सिंह

धनबाद, झारखंड

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