मोरे नइहरवा भईया भतीजवा
भला हो कन्हईया लाल।
भरल नइहरवा बड़ा सोहाय
भला हो कन्हइया लाल।
फागुन के महीनवा नइहर हम गईली
भला हो कन्हइया लाल
पिया बिना तनको ना सोहाय ।
भला हो कन्हइला लाल।
ओही रे नइहरवा हम सइयां के बोलवली,
भला हो कन्हइया लाल,
मगन फगुअवा सुहावन बुझाय,
भला हो कन्हइया लाल।
ओही रे फ़गुनवा भइया भौजी खेले
भला हो कन्हईया लाल
सइयां भीजाएं रंगवा फुहार
भला हो कन्हइया लाल।
ओही रे नइहरवा सब बर्रा पुआ खाय
भला हो कन्हइया लाल,
सइयां हियवा भाव बड़ा भाय
भला हो कन्हइया लाल।
भरल नइहरवा बड़ा सोहाय।
– श्याम कुंवर भारती ( राजभर)
बोकारो,झारखंड, मॉब.9955509286
