नशा शराब के बेअसर हो जाला।
तोहार हुस्न जब नजर हो जाला।
डगमगाला पांव नशा के असर से,
नशा आंख दिल पर गदर हो जाला।
झुके नजर त सांझ उठे त भोर होला,
निकला रात में दिन ओहर हो जाला।
दिन में काजर ना लगावा तू आंख में ।
उगल सूरज डूब के बेनजर हो जाला।
करिया केस उड़ी त बादर कहा जाई ।
लहराई बरसी बरखा जबर हो जाला।
हंसला से तोहरे जईसे चमके बिजुरी।
जुदाई में तोहरे तन्हाई जहर हो जाला।
मुस्का के मत देखा तिरछी नजर से तू।
तड़प के दिल भारती कहर हो जाला।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर)
बोकारो,झारखंड, मीन.9955509286
