नहा खा कर व्रत धरा, निर्जला है आज,
जीतिया का नेम है, पुत्र की है लाज।
न अन्न का दाना लगे, न पानी की बूँद,
बस मेरे लाल की लगे, उम्र की लंबी पूँछ।
फल्गु की धार जैसी, बहती है ममता,
जीयुत वाहन की कथा, सुनती है हर माता।
भूख प्यास सब भूल गई, याद है बस तेरा नाम,
जीते रहो मेरे लाल, यही है माँ का काम।
हे जिउतिया माता सुनो, अरज करे ये माय,
मेरे पुत्र पर सदा, अपनी छाया बनाए रखो।
आभा की कामना पुत्र की लम्बी उम्र हो।
पुत्र का जीवन सुखमय और स्वस्थ हो।
– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा, पटना, बिहार
