( 1 ) कविता
मन भावों की,
है बहती सरिता !
चले सदा हर्षाए..,
हँसाए गुदगुदाए कविता !!
( 2 ) कविता
स्वान्तः सुखाय की,
है अद्भुत गाथा !
प्रतिपल चले रचाए..,
खिलाए मन की प्रसन्नता !!
( 3 ) कविता
आत्म-सुख की,
सुंदर अनुपम रचना !
चले अभिव्यक्त करते..,
तन-मन की संकल्पना !!
( 4 ) कविता
है सरस्वती की,
विशिष्ट कृपा वरदान !
चलें सदा बाँटते…,
ये प्रेम प्रसाद अविराम !!
( 5 ) कविता
है अनुभूति की,
एक मार्मिक शैली !
चलें जोड़ते शब्द…,
बनाते एक माला अलबेली !!
– सुनील गुप्ता, जयपुर,राजस्थान |
