उसने कहा था
कि, तुम्हारा भाग्य
बहुत अच्छा है..
और एक दिन
अपने पुरुषार्थ से
बनोगे सफल मनुष्य !!1!!
उसकी बात का
अवचेतन मन पर
पड़ गया बीज…
चलता रहा जीवन
बनने की ख्वाहिश में
बढ़ता चला उम्र भर !!2!!
बचपन चला बीता
जवानी ढल गयी
प्रौढ़ावस्था से गुजर…
वृद्धावस्था आ गयी
जीवन कोरा कागज सा
ख्वाहिशें सभी अपूर्ण रहीं !!3!!
तभी मन जागा
अंतस शक्ति देखी
स्वयं को जानकार…
बात आगे बढ़ी
अपनी पहचान कर
प्रभु प्रसन्नता पायी !!4!!
मिल गया ध्येय
जीवन का लक्ष्य
करके प्रसन्नता को लीन…
अन्यों की खुशी में
अंततः मिल गया
हमें स्वांतः सुखाय !!5!!
-सुनील गुप्ता, जयपुर, राजस्थान
