शंकरत्व के बिना सब निर्मूल है – हरी राम यादव

शंकरत्व ही इस सृष्टि का मूल है। वह ही तना पत्ती फल फूल है। शंकरत्व ही कृषि और विज्ञान है। शंकरत्व ही तो अनुसंधान है। शंकरत्व प्रेम अहिंसा बंधुत्व है।…

शारदा प्रेम और संस्कृति की प्रवाहिनी – कविता बिष्ट ‘नेह

vivrtidarpan.com टनकपुर – टनकपुर में स्थित पूर्णगिरि धाम आस्था और सौंदर्य का अद्भुत संगम है। यह महान तीर्थ अपनी दिव्यता और अलौकिक वातावरण के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यहाँ…

मुक्तक – श्याम कुंवर भारती

उलझन में इश्क <> तेरी खामोशी मोहब्बत में दिल बगावत करने लगा है। निगाहे मुझसे चुराना चाहत में रुकावट करने लगा है। कभी हां कभी ना उलझन में पड़े हो…

भारतीय चेतना की कृतज्ञता और पाश्चात्य जगत का थैंक्स गिविंग डे – विवेक रंजन श्रीवास्तव

utkarshexpress.com – थैंक्स गिविंग और भारतीय चेतना की कृतज्ञता को एक साथ रखकर देखने पर स्पष्ट लगता है कि दो संस्कृतियों के मनुष्यता के मूल भाव नितांत समान हैं । दोनों…

आराधिका साहित्यिक मंच की 52 वीं काव्य गोष्ठी हुई संपन्न

vivratidarpan.com -आराधिका साहित्यिक मंच (पंजी.) के तत्वावधान में 15 नवंबर’ 2025 को 52 वीं भव्य आभासी काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जो 4:00 बजे से रात्रि लगभग 07: 30…

पशुपति नाथ हृदय विकल – श्याम कुंवर भारती

  धू धू कर के आज हर आलीशान महल क्यों जल रहा है। दिलों दबा आवाम आक्रोश निकल कर क्यों उबल रहा है।   दोषी क्या हुक्मरानों की हुकूमत और…

  चाँदनी रात – डॉ. सत्यवान सौरभ

चाँदनी रात आई धीरे-धीरे, तारों ने जगमगाया सवेरा। नींद में सपनों का साज बने, प्यारा मौसम हो प्यारा भेरा।   छोटे-छोटे पत्ते सो रहे, फूलों पर ओस की बूँदें। खिलखिलाते…

संगत ने की निशान साहिब के चोले की सेवा

vivratidarpan.com देवबंद (महताब आज़ाद) – चौथे पातशाह साहिब श्री गुरू रामदास जी के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में चलने वाले कार्यक्रम सोमवार को निशान साहिब के चोले की सेवा के साथ…

छंद (बापू के बंदर और गधा) – जसवीर सिंह हलधर

  बापू तेरे बंदरों की ,जांच पड़ताल करी , अंधे वाला जज बना न्याय न दिला सका।   चुप रहने वाला जिला,अधिकारी बन गया , शिक्षा और स्वास्थ की दवाई…

प्यारा सा गुलाब – डॉ. सत्यवान सौरभ

  गुलाब की पंखुड़ियाँ लाल, महकाती हैं खुशबू माल। तितली आती है पास में, नाचती है झूम के साथ में।   सूरज की किरणें चूमे, फूल की माला सजे। बच्चों…