राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा  केवल राजनीतिक स्टंट – कुमार कृष्णन

vivratidarpan,com – बिहार में सम्पूर्ण विपक्ष वोट चोरी के सवाल पर पूरी मजबूती से एकजुट है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा में अप्रत्याशित एवं ऐतिहासिक भीड़…

कुत्तों पर शीर्ष अदालत के फैसले से नाराज पशुप्रेमी – मनोज कुमार अग्रवाल

vivratidarpan.com – पूरे देश में आवारा कुत्तों के उत्पात मचाने, इंसानों को काटने की शिकायतों की भरमार हो गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर लगातार हो…

तेरा क्या होगा भूरिया (व्यंग्य) –  मुकेश “कबीर”

vivratidarpan.com – आज सुबह सुबह बेधड़क भोपाली घर आ गए,फाटक खोले बिना ही भीतर घुसने लगे तो हमने टोका कि चच्चा घर में घुसने का नियम भूल गए क्या ,पहले बजाओ…

नेता विपक्ष की विश्वसनीयता पर संकट (दृष्टिकोण)- सुधाकर आशावादी

Vivratidarpan.com – समाज में स्वयं को विश्वसनीय सिद्ध करने के लिए निश्चित मूल्यों का निरंतर अनुपालन अपेक्षित होता है, जिसके लिए गंभीरता से ईमानदारी, सदाचरण, सत्य-निष्ठा, सकारात्मक सोच, राष्ट्र के…

सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि झारखंड के जनांदोलन के प्रतीक थे शिबू सोरेन – सुधीर पाल

vivratidarpan.com –  1855 में जब सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, और फुलो-झानो ने ‘दामिन-ए-कोह’ की धरती पर अंग्रेज़ी राज, महाजनों और जमींदारों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका, तो वह सिर्फ हथियारबंद विद्रोह…

अभिव्यक्ति के नाम पर नकारात्मक राजनीति – डॉ. सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com – सच्चे लोकतंत्र की पहचान यही है कि जनसाधारण को अपनी बात कहने का अधिकार है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कुछ लोगों की आदत हो गयी है कि…

कितना लाएगा रंग, ठाकरे बंधुओं का संग – मुकेश “कबीर”

  Vivratidarpan.com- मुंबई में हुई ठाकरे बंधुओं की सभा की चर्चा पूरे देश में है, भावनात्मक तौर पर यह सभा भले ही सफल रही हो लेकिन राजनीतिक नजरिए से यह…

जल की बूंद-बूंद पर संकट: नीतियों के बावजूद क्यों प्यासी है भारत की धरती? – डॉ. सत्यवान सौरभ

  Vivratidarpan.com – भारत दुनिया की 18% आबादी और मात्र 4% ताजे जल संसाधनों के साथ गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। भूजल का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, असंतुलित…

नया लोकतंत्र? (संपादकीय स्थान रिक्त है) -प्रियंका सौरभ

  Vivratidarpan.com  – “जब कलम चुप हो जाए: लोकतंत्र का शोकगीत”   आपातकाल के दौरान अख़बारों ने विरोध में अपना संपादकीय कॉलम ख़ाली छोड़ा था। आज औपचारिक सेंसरशिप नहीं है, लेकिन…

आपातकाल: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे दुखद और शर्मनाक घटना – विष्णुदत्त शर्मा

  Vivratidarpan.com – “कांग्रेस का लोकतंत्र में विश्वास तब तक है जब तक वह सत्ता में है। जब वह सत्ता से बाहर होती दिखाई देती है, वह संविधान और लोकतंत्र…