मुहब्बत को बया करके हकीकत को बताएगा।
छिपी जो आरजू दिल मे, वही हमको सुनाएगा।
नशा तेरी मुहब्बत का लगा चढने हमारे सर।
मिले जो साथ बस तेरा सदा तू ही निभाएगा
जगा कर चाँद रखता है,सदा पलकों पे रखता है।
फ़लक पर चाँद अपनी चाँदनी को ही निहाएगा।
दुआ माँगे खुदा से हम, जुदा हमको नही होना।
मिले हर हाल मे दोनो, यही दिल से पुकारेगा।
सदा दिल मे बसाया है,करूँ पूजा तुम्हारी मैं।
बना लूँ हम सफ़र अपना,खुशी दिल ये पाएगा।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
