राह  न  सूझे कोई –  मीनू कौशिक

विकट  दौर  है , विचलित  युवा , राह  न  सूझे कोई । पढ़-पढ़  पोथी , लिखें परीक्षा , जग-जग  राते खोई । चड्ढा  चाटे  चाट  मलाई ,  माधो  आलू  को…