सुने पतझड़ दिल में बन के बहार आ जइता । ना ना कईके जान अब त हमार हो जइता । बेचारा दिल मनाई त मनाई कइसे हम बोला। पियासल…
कभी रिसर्च की चुप्पी में, दीवारों पर गोबर उतरा। तो कभी प्रतिरोध की गर्मी में, वही गोबर उल्टा फेरा। मैडम बोलीं — ‘ये संस्कृति है’, छात्र बोले — ‘ये…
vivratidarpan.com – समाज में अच्छे काम करने वालों की कमी नहीं है। देश का बुद्धिजीवी भले ही घर खर्च की चिंता न करे, मगर समाज की चिंता उसे लगी रहती…